सिमरन सेवा सोसायटी, बीकानेर गुरूद्वारा सार्दुल कॉलोनी और लालगढ़ गुरुद्वारा के संयुक्त तत्त्वावधान में गुरुद्वारा श्रीगुरुनानक दरबार लालगढ़ में शुक्रवार को गुरू गोविंदसिंह के बेटे जोरावरसिंह, बाबा फतेहसिंह, माता गुजर कौर का शहीदी गुरुपर्व मनाया जाएगा। गुरूद्वारे के अध्यक्ष बलबिन्दरसिंह गिल ने बताया कि शुक्रवार सुबह 9 बजे गुरू ग्रंथ साहब जी को सहज पाठ का भोग लगेगा। इसके बाद सुबह साढ़े नौ बजे रागी जत्थे कीर्तन करेंगे। सुबह 11 बजे से गुरुद्वारा श्री गुरुनानक देवजी अरोड़ वंश में दिल्ली, पंजाब से आए सदस्य का जत्था सिमरन और कीर्तन करेगा। दोपहर एक बजे से लंगर बरतेगा। विदित रहे कि गुरू गोविंदसिंह के दोनों बेटों को औरंगजेब में इस्लाम कबूल न करने पर जिंदा की दीवार में चिनवा दिया था। अपने दो लाल की चिनवा देने की सूचना मिलने पर मां गुजर कौर ने भी अपने प्राण त्याग दिए थे। सिखों के 10वें गुरु गुरुगोविंदसिंह के 4 बेटों में से 2 चमकौर की गढ़ी युद्ध में शहीद हुए थे और दो को औरंगजेब ने दीवार में चिनवा दिया था। उनकी शहादत को याद करते हुए शहीदी गुरुपर्व मनाया जाता है। सिमरन सेवा सोसायटी, गुरुद्वारा सार्दुल कॉलोनी और लालगढ़ के संयुक्त तत्त्वावधान में होंगे कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी बीकानेर ने गुरुवार को रानी बाजार गुरुद्वारे में वीर बाल दिवस मनाया। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष विजय आचार्य ने कहा कि यह दिन उन वीर बालकों के बलिदान को याद करने का दिन है जिन्होंने देश और धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिए। पीएम का आभार जताते हुए कहा कि आज के दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करने से देश के बच्चों में देश के इतिहास के बारे में जानकारी बढ़ी है। सिख पंथ के 10वें गुरु गोविन्द सिंह के बेटों ने धर्म की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया वह हमेशा भारतीय इतिहास में स्विर्णम अक्षरों में लिखा रहेगा। उनके बलिदान का ही परिणाम है कि देश में उस समय जबरन धर्म परिवर्तन करने पर रोक लगी और धर्म की रक्षा पीएम मोदी ने आज के दिन को मनाने की घोषणा की। इस दिन गुरु गोविन्द सिंह के साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेहसिंह ने अपना बलिदान दिया। उन्होंने सिख पंथ ने सदा देश की एकता और अखंडता के लिए अपना बलिदान दिया है। इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारणी सदस्य सत्यप्रकाश आचार्य, महामंत्री श्याम सुंदर चौधरी, उपाध्यक्ष विजय उपाध्याय, संगीलाल गहलोत, भारती अरोड़ा, हनुमान सिंह चावड़ा, अशोक प्रजापत, दिनेश महात्मा, जितेंद्र गहलोत, चंद्र मोहन जोशी, पूनम चंद पूनिया, गुरुद्वारा प्रधान सुखदेव सिंह, संतोष सिंह, भूपेंद्र सिंह खालसा, सुखविंदर सिंह, मनदीप सिंह ज्ञानी, बलविंदर सिंह, नवदीप सिंह, भूपेंद्र सिंह, जसविंदर सिंह उपस्थित रहे।


