लाहौर हाईकोर्ट ने सिख जत्थे के साथ दर्शन के बहाने पाकिस्तान जाकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत कौर के भारतीय पति करनैल सिंह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई अब 2 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। यह मामला माननीय न्यायमूर्ति फारूक हैदर की अदालत में एक आपत्ति याचिका के रूप में सुना जाएगा। जानकारी के लिए बतादे कि पिछले दिनों वकील अली चंगेजी संधू के माध्यम से सरबजीत के पति ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस प्रकरण में एडवोकेट अली चंगेजी संधू और मोहम्मद नवाज शेख रजिस्ट्रार कार्यालय की आपत्तियों पर अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के संदर्भ में विस्तृत बहस करने का निर्देश दिया था। याचिका का मुख्य आधार यह है कि करनैल सिंह और सरबजीत कौर के बीच विवाह अभी भी विधिसम्मत रूप से कायम है। याचिकाकर्ता का दावा है कि सरबजीत कौर ने करनैल सिंह से विधिवत तलाक नहीं लिया, इसलिए उनका नासिर हुसैन के साथ किया गया विवाह अवैध है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह विवाह इस्लामी सिद्धांतों तथा शरीयत कानून के स्थापित नियमों के विपरीत है। अब अदालत यह निर्धारित करेगी कि विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी की कानूनी स्थिति क्या है और क्या विवाह की वैधता को चुनौती देने के लिए प्रस्तुत याचिका स्वीकार्य है। 2 मार्च की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन यह तय होगा कि आपत्तियां खारिज होंगी या आगे नियमित सुनवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
सिलसिलेवार ढंग से पढ़ें पूरा मामला… 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ गई थी पाकिस्तान: कपूरथला के गांव अमानीपुर की रहने वाली सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गई थी। यह सिख जत्था 10 दिन तक पाकिस्तान में रहा। दर्शन करने के बाद जत्था 13 नवंबर को भारत लौटा: उन्होंने सिख गुरुओं से जुड़े विभिन्न स्थलों के दर्शन किए और 13 नवंबर को भारत वापस लौट आए। पूरे सिख जत्थे के एक साथ भारत लौटने से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और 3 महिलाओं समेत कुल 9 श्रद्धालु पहले लौट आए थे। सिख श्रद्धालुओं के साथ वापस नहीं लौटी: हालांकि जब श्रद्धालुओं का पूरा जत्था वापस लौटा तो 1923 की जगह 1922 लोग ही वापस पहुंचे। जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि सरबजीत कौर वापस नहीं आई है। उसका नाम न तो पाकिस्तान के एग्जिट रिकॉर्ड में था और न ही भारत के एंट्री रिकॉर्ड में मिला। पहले माना गया कि वह लापता है। इसके बाद पाकिस्तान में भी लोकल पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी उसकी तलाश शुरू कर दी। निकाहनामा और वीडियो वायरल होने से पता चला: इसके बाद अचानक उर्दू में लिखा सरबजीत का निकाहनामा वायरल हो गया। जिसमें लिखा था कि सरबजीत ने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म अपना लिया है। उसने शेखुपुरा नूर हुसैन नाम के मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कर लिया है।


