लुधियाना से क्रिकेट का एक सितारा ओमान में चमक रहा है। यहाँ पले-बढ़े जतिंदर सिंह ओमान क्रिकेट टीम के कप्तान बन गए हैं। जतिंदर सिंह ने यह उपलब्धि तब हासिल की जब उनके परिवार का क्रिकेट के प्रति कोई रुझान नहीं था। वे क्रिकेट छोड़ उन्हें पढ़ाई पर फोकस करने को कहते थे, लेकिन पढ़ाई में वे कमजोर थे, तो उन्होंने अपनी इच्छा को ही उपलब्धि में बदल दिया। जतिंदर रामगढ़िया बिरादरी से हैं। लुधियाना में रहते हुए उन्हें क्रिकेट से बेहद लगाव था और इस चक्कर में वे पढ़ाई भी नहीं करते थे। परिवार में किसी का क्रिकेट में कोई करियर नहीं था, इसलिए पढ़ाई पर ज़ोर था। माता-पिता उन पर क्रिकेट के बजाय पढ़ाई पर फोकस करने का दबाव बनाते थे। 14 साल की उम्र में पिता के पास गए मस्कट जतिंदर सिंह के पिता गुरमेल सिंह ‘रॉयल ओमान पुलिस’ में 1975 से नौकरी करते थे। जतिंदर पहले यहीं (भारत में) पढ़ते थे और उनकी क्रिकेट में बहुत रुचि थी, लेकिन परिजन उन्हें पढ़ाई पर ज़ोर देने को कहते थे। 2003 में पिता ने परिवार को वहीं शिफ्ट कर लिया। 14 साल के जतिंदर, माँ परमजीत कौर और तीन भाई-बहनों के साथ ओमान चले गए। जतिंदर ने मस्कट के इंडियन स्कूल में पढ़ाई की। ओमान में भी पिता का ज़ोर पढ़ाई पर ही था
1989 में लुधियाना में हुआ जन्म लुधियाना में 5 मार्च 1989 को जन्मे जतिंदर का परिवार वर्ष 2003 में ओमान शिफ्ट हो गया था। वहीं से उनके क्रिकेट करियर की असली शुरुआत हुई। जतिंदर सिंह दाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज हैं और पिछले एक दशक से ओमान के बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ माने जाते हैं। उन्होंने 2015 में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया, जबकि 2019 में ओमान को वनडे दर्जा मिलने के बाद उन्होंने ODI क्रिकेट में भी कदम रखा। तब से वे लगातार टीम के लिए महत्वपूर्ण पारियां खेलते आ रहे हैं। कप्तान के रूप में जिम्मेदारी हाल के वर्षों में जतिंदर सिंह को ओमान टीम की कप्तानी सौंपी गई। उनकी अगुवाई में ओमान ने एशिया और विश्व स्तर के बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी है। 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जतिंदर सिंह ओमान के लिए वनडे और टी-20 दोनों प्रारूपों में 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने कई शतक और अर्धशतक लगाए हैं, जबकि टी-20 में भी 1400 से अधिक रन बनाकर खुद को टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया है। उनकी सर्वश्रेष्ठ वनडे पारी 118 रन की रही है। विश्व कप 2026 में ओमान ने ग्रुप स्टेज में कुल 5 मैच खेले हैं, जिनमें टीम को 1 जीत और 4 हार का सामना करना पड़ा। लुधियाना से ओमान तक का सफर जतिंदर सिंह के परिवार में कोई स्पोर्ट्स बैकग्राउंड नहीं था, इसलिए क्रिकेट को करियर में तब्दील करना एक बड़ी चुनौती थी। 2003 में जब परिवार ओमान माइग्रेट हुआ, तब जतिंदर को क्रिकेट के तकनीकी पक्षों की ज्यादा जानकारी नहीं थी। लुधियाना में वे सिर्फ मोहल्ले में भाइयों और दोस्तों के साथ क्रिकेट खेले थे। ओमान आकर उन्होंने स्कूल मिड-टर्म में जॉइन किया था, इसलिए शुरुआत में स्कूल टीम में सिलेक्शन नहीं हुआ। अगले साल इंटर-हाउस मैच के लिए ट्राई किया तो सिलेक्ट हो गए। जतिंदर कभी किसी क्रिकेट एकेडमी से नहीं जुड़े और न ही उनका कोई औपचारिक कोच रहा। उन्होंने ओमान में पहले स्कूल टीम, फिर अंडर-15 और उसके बाद 2007 में अंडर-19 टीम में जगह बनाई। वे टीम में विकेटकीपर-बल्लेबाज थे और 2011 में नेशनल टीम का हिस्सा बनने के बाद से लगातार खेल रहे हैं।


