लुधियाना जिले की जगराओं सिधवां बेट के नजदीकी गांव परजियां बिहारीपुर का रहने वाला युवक हरविंदर सिंह करीब ढाई साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर आखिरकार अपने वतन भारत लौट आया। जुलाई 2023 की भीषण बाढ़ ने जिस युवक को गलती से सरहद पार करवा दिया था, आज वही युवक अपनों की गोद में सुरक्षित लौट आया। जानकारी के मुताबिक हरविंदर सिंह जुलाई 2023 में फिरोजपुर के हुसैनीवाला क्षेत्र अंतर्गत गांव गट्टी राजोकी में आई भयंकर बाढ़ के दौरान अपनी बहन व अन्य रिश्तेदारों की मदद के लिए वहां गया हुआ था। घर का सामान निकालते समय अचानक बाढ़ का तेज बहाव आया और हरविंदर को अपने साथ बहा ले गया। पानी का रुख ऐसा था कि वह बहता हुआ सीधे पाकिस्तान की सीमा में जा पहुंचा। पाकिस्तान सैनिकों ने हिरासत में लिया पाकिस्तान पहुंचते ही पाक रेंजर्स ने उसे हिरासत में ले लिया। सूत्रों के अनुसार युवक से लंबी पूछताछ की गई। इसके बाद बीएसएफ और पाक रेंजर्स के बीच बातचीत तो शुरू हुई, लेकिन कागजी औपचारिकताओं और सीमा नियमों के चलते हरविंदर को पाकिस्तान की जेल में बंद कर दिया गया, जहां उसने करीब ढाई साल तक सजा जैसी जिंदगी काटी। इस लंबे समय में परिवार को उसकी कोई ठोस खबर नहीं मिली। घर में इंतजार भी था और मातम भी। हर दिन उम्मीद टूटती और फिर जुड़ जाती। आखिरकार 31 जनवरी 2026 की रात करीब 11:30 बजे, वाघा बॉर्डर के रास्ते 7 अन्य भारतीय नागरिकों के साथ हरविंदर सिंह को भारतीय अधिकारियों के हवाले कर दिया गया। आज 01 फरवरी 2026 को पत्नी सिकंदर कौर, ससुर जीत सिंह और गांव के सरपंच जसवीर सिंह उसे अपने साथ गांव परजियां बिहारीपुर वापस लेकर पहुंचे। जैसे ही युवक गांव पहुंचा, माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। उसे देखने के लिए गांव उमड़ पड़ा। पिता को देख दौड़ पड़ा बेटा सबसे मार्मिक पल तब आया जब अपने पिता को सामने देख बेटा दौड़कर उसकी गोद में चढ़ गया और मासूमियत से बोला “पापा, आप कहां चले गए थे?”बेटे के ये शब्द सुनते ही हरविंदर समेत पूरे परिवार की आंखें नम हो गईं। गांव में हरविंदर का अपने परिवार, विशेषकर अपने बेटे के साथ भावनात्मक पुनर्मिलन हुआ। पत्नी सिकंदर कौर ने पति को सामने देख कहा मुझे भगवान पर पूरा भरोसा था। मैं रोज गुरुद्वारा साहिब जाकर बस यही अरदास करती थी कि आप वापस लौट आएं। मुझे यकीन था, आप एक दिन जरूर आएंगे। हरविंदर सिंह ने बताया कि बाढ़ के दौरान वह भैंसों को निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वह खुद भी भैंसों के साथ बह गया। सीमा पार पहुंचते ही पाकिस्तान पुलिस उसे थाने ले गई और बाद में लाहौर जेल भेज दिया गया, जहां उसने कठिन हालातों में लंबा वक्त बिताया। करीब ढाई साल बाद वतन वापसी की यह कहानी आज पूरे इलाके में इंसानियत, सब्र और उम्मीद की मिसाल बन गई है।


