आम जनता की सुविधा और पारदर्शिता के उद्देश्य से लागू डिजिटल रजिस्ट्री प्रणाली की सुविधा की आड़ में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। कुछ दलालों और अधिकारियों की ओर से शहर में बैन की गई रजिस्ट्रियां फतेहगढ़ साहिब की खमाणो तहसील से करवाए जाने की शिकायत के बाद एफसीआर पंजाब अनुराग वर्मा ने सब-रजिस्ट्रार रमणदीप कौर को नोटिस जारी कर उनकी आईडी ब्लॉक कर दी है। 24 घंटे के भीतर उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक मलौद में हुए अवैध रजिस्ट्रियों के खुलासे के बाद शहर में प्रतिबंधित रजिस्ट्रियां करवाने वाला नेक्सस फतेहगढ़ साहिब की तहसील खमाणो तक पहुंच गया। सब-रजिस्ट्रार रमनदीप कौर द्वारा वसीका नंबर 1322, 1310, 1324, 1308, 1307, 1306, 1336, 1329, 1326, 1325, 1330, 1305, 1323 और 1328 की रजिस्ट्रियां कीं गईं। जोकि फुल्लांवाला, महमूदपुरा, मंसूरा, लोहरा और धांधरा की हैं। ये रजिस्ट्रियां उसी आईडी से की गईं, जिससे पहले मलौद में विवादित रजिस्ट्रियां हुई थीं। पूरे मामले की शिकायत दमनप्रीत सिंह ने सीएम भगवंत मान, एफसीआर अनुराग वर्मा और जांच अधिकारी हरविंदर सिंह से की। डीसी फतेहगढ़ साहिब, आईओ की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की गई। कोई भी आरोपी बख्शा नहीं जाएगा रमणदीप कौर जिले से बाहर पहुंचा नेक्सस, विजिलेंस ले सकती है एक्शन रूप से रजिस्ट्री करता है। कार्रवाई के रूप में जिम्मेदार को सस्पेंड कर देना समाधान नहीं है। इस मामले में दूसरे जिले में जाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया है। नियम अनुसार मामले की गहन जांच बनती है। यही नहीं जिनकी आईडी से दस्तावेज अपलोड हुए हैं, पंजाब सरकार को उन सभी अधिकारियों की भूमिका, व रेवेन्यू लॉस की निष्पक्ष जांच विजिलेंस से करवानी चाहिए। सुखजिंदर सिंह पूर्व कानूनगो डिजिटल रजिस्ट्री प्रणाली का सिस्टम पंजाब सरकार ने जनता की सुविधा और पारदर्शिता के लिए शुरू किया था, लेकिन कुछ एजेंट और अधिकारी इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। नियमों के अनुसार जिस क्षेत्र की संपत्ति है, उसकी रजिस्ट्री उसी जिले में संबंधित सब-रजिस्ट्रार द्वारा ही स्वीकृत की जा सकती है। किसी अन्य जिले में रजिस्ट्री करवाना नियमों के खिलाफ है। मामले से साफ है कि इसे कोई सिंगल हैंड डील नहीं कर सकता। पूरे नेक्सस है, लेकिन कार्रवाई केवल उस अधिकारी पर होती है जो अंतिम आरोप: दमनप्रीत सिंह ने आरोप लगाया है कि लुधियाना वेस्ट, ईस्ट और सेंट्रल तहसीलों में भी फर्जी एनओसी लगाकर रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। उनका दावा है कि उनके पास इसके पुख्ता सबूत हैं।


