पंजाब के खन्ना में कूड़े के रेमिडेशन को लेकर बड़े घोटाले की आशंका है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी नगर निगम लुधियाना के कमिश्नर को दी गई है। गांव रसूलड़ा के पास स्थित नगर कौंसिल के कूड़े के डंप की सफाई के लिए दिल्ली की एक कंपनी को 3 करोड़ 83 लाख रुपए का टेंडर दिया गया था। लोक सेवा क्लब के अध्यक्ष पीडी बांसल ने इस मामले में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। नगर कौंसिल ने बार-बार बदली कूड़े की मात्रा मामले में सबसे बड़ी विसंगति कूड़े की मात्रा को लेकर सामने आई है। नगर कौंसिल ने अलग-अलग समय पर कूड़े की मात्रा को 90 हजार मीट्रिक टन, फिर 1 लाख 47 हजार टन और बाद में 1 लाख 28 हजार मीट्रिक टन बताया। कंपनी का दावा है कि उसने टेंडर के अनुसार 90 हजार मीट्रिक टन कूड़ा साफ कर दिया है। लोक सेवा क्लब के अध्यक्ष ने उठाए सवाल बांसल का आरोप है कि यह टेंडर एक चहेते ठेकेदार को दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर डंप पर कूड़ा 90 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा था, तो नगर कौंसिल ने पहले सही सर्वे क्यों नहीं कराया। साथ ही, सरकारी मंजूरी के बिना निजी कंपनी से सर्वे कराकर रेमिडेशन का प्रस्ताव क्यों लाया गया। ईओ को दी शिकायत आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने भी इस मामले में ईओ को शिकायत दी है। उन्होंने कंपनी की बकाया पेमेंट रोकने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि डंप को पूरी तरह साफ करने के लिए दो-तीन और इसी तरह के टेंडर लगाने पड़ सकते हैं। सरकार को करोड़ों का चूना जांच का तीसरा पहलू यह है कि नगर कौंसिल अब सिर्फ 28 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप पर होने का दावा कर रही है। 90 हजार मीट्रिक टन कूड़ा उठाने का दावा किया जा रहा है। डंप पर अभी भी इतने अंबार क्यों लगे हैं। शक जताया गया कि इसमें सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगा है।


