पंजाब के लुधियाना में ट्रैवल एजेंट अमित मल्होत्रा, उसकी बहन और सहयोगी करुण कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि मॉडल टाउन पुलिस ने एक ही दिन में उनके खिलाफ धोखाधड़ी के चार मामले दर्ज किए हैं। शिकायतों पर जांच लंबे समय से लंबित थी। इन मामलों में हुई FIR दर्ज आरोपी इश्मीत चौक के पास ग्लोबल वे इमिग्रेशन ऑफिस से इमिग्रेशन का कारोबार चलाते थे। पहली FIR अमृतसर के गांव पंडोरी वड़ैच के विशालदीप सिंह के बयान पर दर्ज की गई। विशालदीप सिंह ने बताया कि आरोपी ने यूके का वीजा दिलाने के नाम पर उससे 10 लाख रुपए लिए। आरोपी ने न तो वीजा का इंतजाम किया और न ही उसके पैसे लौटाए। उसने 9 अक्टूबर 2024 को आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। दूसरा मामला सलेम टाबरी की भगवान दास कॉलोनी की शरणजीत कौर की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी ने उसके और उसके पति के लिए यूके का वीजा दिलाने के नाम पर 11.75 लाख रुपये लिए। शिकायतकर्ता ने 17 जून 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। तीसरा मामला गुरदासपुर के गांव खुब्बी के नवदीप सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि कनाडा का वीजा दिलाने के नाम पर आरोपी ने 3.25 लाख रुपये लिए। उन्होंने 18 सितंबर 2024 को आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। चौथा मामला प्रताप सिंह वाला के इंद्रजीत सिंह के बयान पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने 31 अगस्त 2024 को दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी ने उसकी पत्नी, बेटे और खुद के लिए वीजा दिलाने के नाम पर 8.9 लाख रुपये लिए, लेकिन वह नहीं लौटा। आरोपी ने उसके पैसे वापस नहीं किए। IPC की धारा 420 और इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अमित मल्होत्रा और उनकी बहन वीनू मल्होत्रा को 6 सितंबर 2024 को विदेश भेजने के नाम पर कई लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी ने शिकायत दर्ज कराई थी। महिला पुलिसकर्मी के मुताबिक, आरोपी ने उनके भाई और मां को यूके का वीजा दिलाने के नाम पर 14.30 लाख रुपये ठगे थे। इससे पहले 12 अगस्त 2024 को संगरूर के धुरी निवासी हरदीप सिंह और उनकी पत्नी अमनदीप कौर इश्मीत चौक के पास पानी की टंकी पर चढ़ गए थे और इसी फर्म पर 10 लाख रुपए ठगने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि इमिग्रेशन फर्म ने उनके लिए वीजा सुरक्षित करने के लिए 10 लाख रुपए के अग्रिम भुगतान के साथ 26 लाख रुपये की मांग की थी। उन्होंने इस साल फरवरी में आरटीजीएस के जरिए 10 लाख रुपए का भुगतान किया था। हालांकि, फर्म ने प्रक्रिया में देरी की और जब भी वे वीजा पर अपडेट के लिए संपर्क करते तो बहाने बनाते। बाद में, आरोपी ने पैसे वापस करने से इनकार कर दिया। घटना के एक दिन बाद 13 अगस्त 2024 को जिला प्रशासन ने कई शिकायतों के मद्देनजर फर्म का लाइसेंस रद्द कर दिया था।


