पंजाब के लुधियाना में एक ओर जहां एक प्रिंसिपल को डिजिटल अरेस्ट करके तथा गिरफ्तारी का डर दिखाकर जहां 47.30 लाख रुपए लग लिए गए, वहीं दूसरी ओर एक हौजरी के मालिक ने निवेश धोखाधड़ी में 38 लाख रुपए गंवा दिए। पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग में जल्दी और भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने छह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों की पहचान राजस्थान के उदयपुर निवासी गोविंद टाक, उत्तर प्रदेश के कानपुर के किदवई नगर निवासी विकास त्रिवेदी, मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी अनीता गढ़वाल, नई दिल्ली के डॉ. मुखर्जी नगर निवासी पवन, पश्चिम बंगाल के कोलकाता निवासी शफिया रजा और मध्य दिल्ली के करोल बाग निवासी राम कुमार के रूप में हुई है। साउथ सिटी निवासी शिकायतकर्ता मनोज पल्टा ने बताया कि 31 जनवरी 2024 को अपने फोन पर सोशल नेटवर्किंग एप्लिकेशन स्क्रोल करते समय उसने ऑनलाइन ट्रेडिंग से संबंधित एक विज्ञापन पर क्लिक किया। कुछ ही देर में उसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। भारी मुनाफा देने का दिया लालच कॉल करने वाले ने खुद को एक ऑनलाइन ट्रेडिंग सपोर्ट ऐप का एग्जीक्यूटिव बताया। कॉल करने वाले ने उसे अपने ऐप के जरिए ट्रेडिंग करने पर जल्दी और भारी मुनाफा कमाने का वादा किया। कॉल करने वाले ने उसके मोबाइल फोन पर दो एप इंस्टॉल करवाए। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कॉल करने वाले के कहने पर अलग-अलग बैंक खातों के जरिए 38 लाख रुपए निवेश किए। उसके निवेश खाते एप्स पर दिखाई दिए। इसके अलावा उसने कहा कि वह नकदी निकालना चाहता था और उसने आरोपी से पैसे उसके खातों में ट्रांसफर करने को कहा। पैसे निकालने के लिए 10 लाख और निवेश करने के लिए कहा आरोपी ने बहाने बनाने शुरू कर दिए कि पैसे उसके खाते में ट्रांसफर होने में कम से कम 10 दिन लगेंगे। आरोपी ने उससे यह भी कहा कि अगर उसे जल्दी रिफंड चाहिए तो उसे 10 लाख रुपए और निवेश करने होंगे।
शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि कुछ दिनों के बाद ऐप्स ने काम करना बंद कर दिया। जब उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। सेवानिवृत्त कॉलेज प्रिंसिपल को किया ‘डिजिटल अरेस्ट’,मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर
इसी तरह एक और घटना में साइबर अपराधियों ने 80 वर्षीय सेवानिवृत्त कॉलेज प्रिंसिपल को बंधक बनाकर पांच दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और उन पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। जालसाजों ने उनसे सिक्योरिटी के तौर पर बैंक खाते में 47.30 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए और वादा किया कि चीजें साफ होने पर पैसे लौटा दिए जाएंगे। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला वर्धमान ग्रुप के प्रमुख और पद्म भूषण पुरस्कार विजेता 82 वर्षीय एसपी ओसवाल से इसी तरह 7 करोड़ रुपए ठगे जाने के चार महीने से भी कम समय बाद सामने आया है। पुलिस ने कहा कि इस बार इस्तेमाल की गई कार्यप्रणाली ओसवाल मामले जैसी ही है और उन्हें संदेह है कि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही मास्टरमाइंड है। आरोपी ने खुद को बताया सीबीआई अधिकारी
राजगुरु नगर की पीड़िता सुशीला वर्मा ने बताया कि 7 जनवरी को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। वर्मा ने बताया कि कॉल करने वालों ने उन पर निजी एयरलाइनर से जुड़े धन शोधन के लिए मुंबई स्थित बैंक खाते का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। आरोपी ने उन्हें फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजे और मामले को किसी को न बताने की चेतावनी दी। वीडियो काल करके दिखाया आरोपी ने दिखाया फर्जी सीबीआई कार्यालय शिकायतकर्ता ने कहा कि जालसाजों ने उन्हें सीबीआई कार्यालय से वीडियो कॉल करके धमकाया। उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी वैधता पर भरोसा हो गया और उन्होंने आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में कई लेन-देन में पैसे ट्रांसफर कर दिए। उन्हें बताया गया कि उनके लेन-देन की फोरेंसिक जांच के लिए पैसे की जरूरत है। शिकायतकर्ता ने कहा कि जालसाजों ने वादा किया था कि 72 घंटे के भीतर पैसे वापस कर दिए जाएंगे। पूरी ठगी के दौरान आरोपियों ने उन्हें वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल निगरानी में रखा। बाद में जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बोले- इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह… साइबर क्राइम स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह ने बताया कि धारा 319(2) (व्यक्ति के रूप में धोखाधड़ी), 318(4) (धोखाधड़ी और बेईमानी से किसी को संपत्ति देने के लिए प्रेरित करना), 338 (मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी), 336 (3) (जालसाजी), 340 (2) (जाली दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का उपयोग), और 351(2) (आपराधिक धमकी) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस बैंकों के साथ मिलकर उन खाताधारकों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने पैसे प्राप्त किए हैं। इससे पहले, 9 जनवरी को, साइबर अपराधियों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए कथित तौर पर एक 81 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना अधिकारी से 35.30 लाख रुपए से अधिक की ठगी की थी। साइबर क्राइम थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस आरोपी का पता लगाने की कोशिश कर रही है।


