अलवर शहर के RR कॉलेज में 16 दिन से घूम रहे लेपर्ड को पकड़ने के लिए जयपुर से टाइगर का पिंजरा आया है। जिसे आरआर कॉलेज में सोमवार को लगाया जाएगा। ऐसा इसलिए किया है कि यह पिंजरा लेपर्ड पकड़ने वाले पिंजरे से करीब दो गुना बड़ा है। जिसमें लेपर्ड आसानी से घुस सकेगा। अब तक लेपर्ड के दो पिंजरे कॉलेज के जंगल में लगे हैं। लेकिन लेपर्ड इन पिजरों में नहीं घुसा। हालांकि वह कई बार पिंजरे के आसपास आया है। लेपर्ड पकड़ में नहीं आने के कारण आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों में डर है। यह पिंजरा करीब 14 फीट लंबा वनकर्मियों ने बताया कि जयपुर से नया पिंजरा आया है। जो करीब 14 फीट लंबा है। करीब 6 फीट ऊंचा है। इस पिंजरे को आरआर कॉलेज के जंगल में लेपर्ड के आने वाली लोकेशन पर लगाया जाएगा। ताकि लेपर्ड पिंजरे में आसानी से आ सके। अभी तक वनकर्मियों को लग रहा था कि लेपर्ड को पकड़ने के लिए लगाए पिंजरे थोड़ो छोटे हैं। जिसके कारण वह पिंजरे में नहीं घुसा। हालांकि दो तीन बार पिंजरे के आसपास लेपर्ड आया भी है। 1 दिसंबर को लेपर्ड जंगल में दिखा आरआर कॉलेज में सबसे पहले 1 दिसंबर को लेपर्ड दिखा था। उसके बाद दिन के समय नजर नहीं आया है। हालांकि रात को कैमरा ट्रैप में तस्वीर मिली हैं। वहीं बराबर पगमार्क भी मिले हैं। रविवार कीरात को लेपर्ड पिंजरों की तरफ नहीं आया। यहां आसपास पगमार्क नहीं मिले हैं। असल में आरआर कॉलेज में करीब 44 हैक्टैयर में जंगल है। इसके पीछे बड़ी जमीन पर खेती होती है। इस कारण लेपर्ड के लिए काफी बड़ा एरिया है।


