अलवर शहर के RR कॉलेज में 14वें दिन भी लेपर्ड पिंजरे में नहीं आया। इसके अलावा वनकर्मियों के इंतजाम अधूरे होने के कारण लेपर्ड को ढूंढ़ भी नहीं सके। आसपास की कॉलोनियों में रहने वालों में डर कायम है। वन प्रशासन ने लेपर्ड को पकड़ने के अब तक कोई अतिरिक्त इंतजाम नहीं किए। केवल औपचारिकता के तौर पर दिन में लेपर्ड को जंगल में ढूंढ़ते हैं। लेकिन 14 दिन में भी लेपर्ड के पगमार्क के अलावा कुछ नहीं ढूंढ़ पाए हैं। पगमार्क रोज मिल रह आरआर कॉलेज के जंगल में लेपर्ड के पगमार्क रोजाना मिले हैं। दो-तीन बार लेपर्ड पिंजरे के पास आया है। लेकिन अंदर नहीं फंसा है। एक दो बार तो लेपर्ड ने पिंजरे के अंदर भी पंजा रखा है। इस कारण वन प्रशासन को लग रहा था कि लेपर्ड जल्दी पिंजरे में आ सकता है। लेकिन अब तक न लेपर्ड पिंजरे में आया न वन प्रशासन उसे दिन में ढूंढ़ सका है। लेपर्ड के कैमरा ट्रैप में फोटो लेपर्ड के कैमरा ट्रैप के फोटो भी बराबर सामने आए हैं। दिन में वनकर्मी ढूंढ़ते हैं। लेकिन दिन के समय कभी लेपर्ड नजर नहीं आता है। पिंजरों और कैमरा ट्रेप की लोकेशन को कई बार बदला गया है। लोगों से सावधानी बरतने की बराबर अपील है। वहीं अब कॉलेज में आने वाले स्टूडेंट्स को भी अधिक सावधानी बरतने की जरूरत हैं। जंगल के अंदर नहीं जाना चाहिए।


