उच्च शिक्षा विभाग ने छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप का बंटाधार कर दिया। योजनाओं के हालात ये है कि विभाग ने स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों और शहीदों के आश्रितों का वजीफा (स्कॉलरशिप) मात्र 60 रुपए और 300 रुपए तय कर रखा है। इसे लेने के लिए आवेदन ही नहीं आ रहे हैं। विभाग हर साल ऑफलाइन आवेदन मांगकर वाहवाही लूट रहा है। सालों से स्कॉलरशिप बढ़ोतरी या इन योजनाओं में बदलाव को लेकर कोई प्रस्ताव तक नहीं बना। बस किराए जितनी भी नहीं स्कॉलरशिप उच्च शिक्षा विभाग की ऐसी 11 स्कॉलरशिप है, जिनमें नाममात्र की राशि मिलती है। हर साल ऑफलाइन आवेदन मांगे जाते हैं, कोई लेने वाला नहीं आता। इस बार फिर उच्च शिक्षा विभाग ने 15 फरवरी तक इन 11 स्कॉलरशिप के लिए छात्रों से ऑफलाइन आवेदन मांगे हैं। एक तरफ जहां छात्र कॉलेज फीस में हजारों रुपए दे रहे हैं, वहीं विभाग इन स्कॉलरशिप में बस के किराए जितनी भी राशि नहीं दे रहा है। गौरतलब है कि इसी तरह कॉलेज आयुक्तालय प्रदेश की छात्राओं को स्कूटी भी समय पर नहीं बांट पा रहा है। ऑफलाइन आवेदन मांगे, हर साल 5 से 10 आवेदन ही आते हैं आवेदन में ही इससे ज्यादा खर्च
विभाग इन योजनाओं को बंद करने या मर्ज करने की बजाय हर साल ऑफलाइन आवेदन मांग रहा है, जबकि राशि ना के बराबर होने के कारण कोई छात्र इनमें आवेदन भी नहीं कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार पिछले साल भी 5-10 आवेदन ही मिले थे। दूसरी ओर छात्रों के इन योजनाओं के आवेदन के लिए पेपर तैयार करने, फॉर्म भरने, इनकम सर्टिफिकेट बनवाने, अटेस्ट करवाने से लेकर जमा करवाने में ही ज्यादा खर्चा हो जाता है। “स्कॉलरशिप योजनाओं की समीक्षा करवाएंगे। इसके बाद आगामी कार्रवाई के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे। आवेदन ऑफलाइन लिए जा रहे हैं तो ऑनलाइन करवाएंगे।”
– डॉ. ओम प्रकाश बैरवा, आयुक्त, कॉलेज शिक्षा


