पिठौरिया में जल संरक्षण के नाम पर सरकारी पैसों की बर्बादी और रिकॉर्ड की बड़ी चूक का मामला सामने आया है। वन विभाग ने वर्ष 2022 में जिस जमीन पर तालाब खुदवाया, वह जमीन निजी निकली। तीन साल के भीतर ही तालाब को मिट्टी में मिला दिया गया। स्पेशल ब्रांच के एसपी ने दक्षिणी छोटानागपुर के आयुक्त और वन प्रमंडल रांची को इस संबंध में पत्र भेजा। इसमें बताया कि पिठौरिया में जिस वन भूमि पर तालाब खोदा गया था, उसे भरकर समतल कर दिया गया है। इस जमीन का इस्तेमाल निजी प्रोजेक्ट के लिए किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। इसलिए मामले की जांच कर कार्रवाई की जाए। इस पत्र के बाद वन विभाग ने पल्ला झाड़ लिया। विभाग की ओर से कहा गया कि हमने तालाब खोदा जरूर था, लेकिन जमीन विभाग की नहीं, निजी व्यक्ति की निकली, इसलिए हम कुछ भी नहीं कर सकते। उधर, ग्रामीण सुरेश बैठा ने कहा कि वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए यह तालाब खोदा था। ग्रामीण खेती, जानवर और अपने लिए इस तालाब के पानी का इस्तेमाल करते थे। लेकिन जब जमीन निजी है और जिसने खरीदा है, वह भी इसे भरवाएगा ही। 1 लाख में खुदवाया था 100×100 फीट का तालाब पिठौरिया पहाड़ी इलाका है। यहां दूर-दूर तक कोई जलस्रोत नहीं है। इसी को देखते हुए वन विभाग ने पिठौरिया में जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और पौधरोपण के लिए 100 गुणा 100 फीट का यह तालाब बनवाया था। इस पर करीब एक लाख रुपए का खर्च आया था। विभाग की सोच थी कि तालाब से आसपास रहने वाले लोगों और पशुओं को पानी मिलेगा। पर तालाब खुदवाने से पहले जांच नहीं की कि जमीन किसकी है। अब जमीन मालिक ने उस जमीन को किसी और को बेच दिया, जिसने तालाब में मिट्टी भरवा दी।
भरने के लिए अनुमति जरूरी
आज जब जल संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे में किसी भी तालाब को भरने के लिए सक्षम पदाधिकारी की अनुमति जरूरी है। जिस तालाब को पिठौरिया में भरा गया है, वह वन विभाग ने खुदवाया है। वह निजी जमीन पर है तो भी अनुमति जरूरी है। नियम है कि आपके घर में एक पेड़ भी है तो उसे काटने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। यह तो तालाब है। हमने खोदा, अब कुछ नहीं कर सकते: वन विभाग नीतीश प्रियदर्शी, पर्यावरणविद यहां खोदा गया था तालाब


