वन विभाग ने मजदूरों का भुगतान रोका:भौतिक सत्यापन नहीं होने से पेमेंट अटका, श्रमिक परिवार सहित कलेक्ट्रेट पहुंचे

वन विभाग द्वारा गड्ढे खुदवाने का भुगतान नहीं मिलने से परेशान श्रमिक परिवार सहित सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे। श्रमिकों का आरोप है कि वन विभाग ने उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया है, जबकि विभाग का कहना है कि भौतिक सत्यापन नहीं होने के कारण भुगतान रोका गया है। जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के पोड़िया निवासी केदार, हरिशंकर और गंगाराम सहित कुल 48 श्रमिक जनवरी महीने में आबू रोड पहुंचे थे। उन्होंने नाकेदार विक्रम की देखरेख में आबू रोड वन क्षेत्र और नाकेदार भागीरथ की देखरेख में जीरावल वन क्षेत्र के रायपुर एरिया में 44,677 और आबूरोड में 6,273 गड्ढे खोदे थे। कुछ स्थानों पर ट्रेंच भी तैयार की गई थी। श्रमिकों को प्रति गड्ढा 18 रुपए की दर से मजदूरी देने का ठेका दिया गया था। करीब डेढ़ महीने तक काम करने के दौरान उन्हें केवल खाद्य सामग्री के लिए 82 हजार रुपए दिए गए। श्रमिकों का दावा है कि उनकी कुल 10,58,586 रुपए की मजदूरी अभी भी बकाया है। वन संरक्षक जगदीश कुमार ने बताया कि ये श्रमिक मध्य प्रदेश से आए हैं और उदयपुर में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों ने खोदे गए गड्ढों का सही मेजरमेंट नहीं करवाया और कुछ गड्ढे आधे-अधूरे हैं। भौतिक सत्यापन न होने के कारण उनका भुगतान रोका गया है। कुमार ने बताया कि श्रमिकों को कई बार मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करवाने के लिए कहा गया, ताकि भुगतान किया जा सके, लेकिन वे शिकायत करने सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने यह भी बताया कि उदयपुर में भी इन श्रमिकों ने इसी तरह से काम किया था और वहां भी भौतिक सत्यापन न करवाकर वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी।

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