राजस्थान में पंचायत चुनाव ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत करवाने हैं या नहीं? राज्य निर्वाचन आयोग के इस सवाल वाली चिट्ठी का सरकार ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। ऐसे में एक साथ चुनाव की आस अधूरी रह सकती है। जवाब नहीं आने के मायने यह निकाले जा रहे हैं कि प्रदेश की जिन 12 जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है, कानूनी पेंच से बचने के लिए उन्हें समय से पहले समाप्त नहीं किया जाएगा। इधर, राज्य निर्वाचन आयोग 25 फरवरी के बाद कभी भी पंचायतीराज चुनावों का कार्यक्रम घोषित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल से पहले पंचायत-निकाय चुनाव कराने के निर्देश दे रखे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट.… वन स्टेट-इलेक्शन के तहत पंचायत चुनाव क्यों नहीं? प्रदेश में अभी 12 जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है। उनके बोर्ड भंग करने में कानूनी अड़चनें हैं। अगर उन्हें भंग किया जाता है तो कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। पंचायती राज अधिनियम की धारा 94 के तहत बोर्ड भंग तभी संभव है, जब राज्य में आपात स्थिति हो। 73वें संविधान संशोधन के बाद पंचायत चुनाव 5 साल में करवाया जाना अनिवार्य है। सरकार सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल से पहले कराने की बात कह चुकी है। ऐसे में चुनावी कार्यक्रम कोर्ट की डेडलाइन के अनुसार ही तय होगा। सूत्र बताते हैं कि एएजी ने सरकार को बोर्ड भंग नहीं करने की सलाह दी है। सरकार बोर्ड कब भंग कर सकती है ? राज्य में ऐसे हालात नहीं हैं। इसलिए सरकार जिला परिषद-पंचायत समितियों के बोर्ड भंग नहीं कर सकती है। 12 जिला परिषदों का कार्यकाल नहीं हुआ पूरा
वन स्टेट वन इलेक्शन के लिए सबसे बड़ी अड़चन 12 जिला (नए जिलों को छोड़कर) परिषद और करीब 135 पंचायत समितियां हैं। इनका कार्यकाल बचा हुआ है। शेष जिलों में कार्यकाल समाप्त हो गया है। जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है, उन जिलों में कोर्ट ने अप्रैल में ही चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने जिला परिषदों में कलेक्टर को लगाया प्रशासक
12 जिलों (भरतपुर, दौसा, जयपुर, जोधपुर, सवाई माधोपुर, सिरोही, अलवर, धौलपुर, बारां, करौली, कोटा और श्रीगंगानगर) की ग्राम पंचायतों और जिला परिषदों का कार्यकाल बचा हुआ है। 4 जिले खैरथल-तिजारा, फलोदी, डीग और कोटपूतली-बहरोड़ भी हैं, जो इन 12 जिलों में से अलग करके बनाए गए हैं। ऐसे में नए के हिसाब से 12 और 4 कुल 16 जिलों में कार्यकाल पूरा होने में समय बचा हुआ है। जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद, नागौर, बांसवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक की करीब 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो गया। अब जानते हैं राज्य निर्वाचन आयोग ने चिट्ठी में क्या लिखा? आयोग ने 24 दिसंबर, 2025 को पंचायतीराज विभाग को चिट्टी लिखी थी। नवगठित एवं पुनर्गठित जिला परिषदों के कार्यकाल के विषय में पंचायती राज अधिनियम, 1994 में कोई स्पष्ट प्रावधान उल्लेख नहीं है। सरकार स्थिति स्पष्ट करें। -नवगठित जिला परिषदों (डीग, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ एवं फलौदी) का कार्यकाल किस तारीख से प्रारंभ हुआ माना जाए। -इनके गठन से प्रभावित जिला परिषदों (भरतपुर, अलवर, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर) की वर्तमान स्थिति के संबंध में स्थिति स्पष्ट करें। -नवगठित जिला परिषद फलौदी, जो कि जिला परिषद जैसलमेर जिसका कार्यकाल दिसंबर, 2025 में पूरा हो चुका है, एवं जिला परिषद -जोधपुर जिसका कार्यकाल सितंबर, 2026 में पूर्ण होगा, के पुनर्गठन से बनी है, के संबंध में स्थिति स्पष्ट करें। दरअसल, 8 नवीन जिला परिषदों के गठन से 12 जिला परिषदें प्रभावित हुई हैं। बालोतरा, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, सलूंबर, डीग, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ एवं फलौदी का गठन किया गया है। 8 जिलों परिषदों- अजमेर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, पाली, राजसंमद, नागौर, जैसलमेर एवं उदयपुर का 5 साल का कार्यकाल दिसंबर, 2025 में समाप्त हो गया है। 4 जिला परिषदों भरतपुर, अलवर, जयपुर एवं जोधपुर का अगस्त-सितंबर 2026 में पूर्ण होने वाला है। इन 21 जिला परिषदों में कार्यकाल पूरा
जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद, नागौर, बांसवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जालौर, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक में जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा हो गया है। सरकार ने इन जिलों में जिला कलेक्टर को प्रशासक लगा रखा है। 12 जिलों (भरतपुर, दौसा, जयपुर, जोधपुर, सवाई माधोपुर, सिरोही, अलवर, धौलपुर, बारां, करौली, कोटा और श्रीगंगानगर) की ग्राम पंचायतों और जिला परिषदों का कार्यकाल बचा हुआ है। 4 जिले खैरथल-तिजारा, फलोदी, डीग और कोटपूतली-बहरोड़ भी हैं, जो इन 12 जिलों में से टुकड़े करके बनाए गए हैं। ऐसे में 12 और 4 कुल 16 जिलों में कार्यकाल पूरा होने में समय बचा हुआ है। मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता
प्रदेश में 25 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन होना है। इसके बाद 28 फरवरी या मार्च के पहले सप्ताह में आयोग कभी भी चुनाव की घोषणा करने की तैयारी में है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रदेश भर में आचार संहिता लग सकती है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा- नवगठित जिला परिषदों और इनके पुनर्गठन से प्रभावित जिलों के कार्यकाल के संबंध में पंचायतीराज विभाग को चिट्टी लिखी है। सरकार वन स्टेट-वन इलेक्शन के संबंध में स्थिति स्पष्ट करें। हमें चिट्टी का जवाब नहीं मिला है। कोर्ट के आदेशों का पालन करने के तहत चुनाव कराने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। राजस्थान सरपंच संघ क्या बोला
राजस्थान सरपंच संघ के प्रवक्ता रफीक पठान का कहना है कि फिलहाल वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत चुनाव कराना संभव नहीं है, क्योंकि 12 जिलों परिषदों का कार्यकाल पूरा होने में 6 से 8 महीने है। ऐसे में सरकार का पंचायती राज संस्थाओं में वन स्टेट-वन इलेक्शन के चुनाव कराने की योजना पूरी नहीं हो सकती है। इसके लिए सरकार को चुनाव टालने होंगे। यह भी सच है कि सरकार ने कोर्ट में चुनाव कराने की बात कही है। ——————–


