वर्टेक्स का मार्केट-कैप 5 साल में दोगुना 11 लाख करोड़:मुंबई की रेशमा की लीडरशिप में कंपनी को मिली कामयाबी, दुनिया की 100 शक्तिशाली महिलाओं में हैं शुमार

साल 1988 की बात है। मुंबई की 11 साल की लड़की माता-पिता के साथ अमेरिका के लॉन्ग आइलैंड पहुंची। सामान कम था, सपने ज्यादा। परिवार छोटे से अपार्टमेंट में रहने लगा। बच्ची का नाम था रेशमा केवलरामानी। आज रेशमा अमेरिका की किसी बड़ी सार्वजनिक बायोटेक कंपनी की पहली महिला सीईओ और प्रेसिडेंट हैं। हाल ही में प्रतिष्ठित ‘टाइम’ पत्रिका ने उन्हें ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर 2026’ चुना है और वे 2025 के 100 सबसे प्रभावशाली हस्तियों की लिस्ट में भी हैं। रेशमा के नेतृत्व में वर्टेक्स का बाजार मूल्य काफी बढ़ा है। अप्रैल 2020 में जब रेशमा सीईओ बनीं, उस वक्त कंपनी का मार्केट कैप लगभग 69 बिलियन डॉलर था। अब करीब दो गुना बढ़कर करीब 120 बिलियन डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपए) है। वे फॉर्च्यून और टाइम जैसी पत्रिकाओं की प्रभावशाली वैश्विक हस्तियों की सूची में मुकेश अंबानी, मार्क जुकरबर्ग और सुंदर पिचाई जैसे दिग्गजों के साथ हैं। टाइम पत्रिका ने लिखा: ‘रेशमा की कहानी ‘अमेरिकी सपने’ का एक जीवंत उदाहरण है।’ रेशमा का यह सफर आसान नहीं था। उनके पिता ने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स छोटी दुकान शुरू की। रेशमा अक्सर वहां काउंटर पर बैठकर ग्राहकों से बात करतीं और शाम को पिता के साथ दिनभर की कमाई का हिसाब रखती थीं। कभी चूहों से डर लगता था उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘हमारे परिवार में करियर के लिए सीमित विकल्प थे- इंजीनियरिंग, डॉक्टर या पुजारी। मैंने चिकित्सा चुना।’ 1998 में बोस्टन यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान के साथ स्नातक की डिग्री ली। किडनी विशेषज्ञ बनीं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जुड़े संस्थानों में रिसर्च करने लगीं। रेशमा अपनी इस यात्रा पर अक्सर एक रोचक किस्सा साझा करती हैं कि लैब में रिसर्च के दौरान उनका सबसे बड़ा डर चूहे थे। वे मजाक में कहती हैं कि उनके करियर के बदलाव में इस डर का भी योगदान था। एक फोन कॉल ने सब बदल दिया वर्ष 2004 में एमजेन बायोटेक कंपनी से उनके पास एक प्रस्ताव आया। यह अवसर कैलिफोर्निया में रिसर्च और डेवलपमेंट विभाग में था। फैसला कठिन था क्योंकि उनका पूरा परिवार और छह महीने के जुड़वां बेटे बोस्टन में थे। जोखिम उठाते हुए उन्होंने और उनके पति ने पुरानी नौकरियां छोड़ीं। कैलिफोर्निया चले गए। रेशमा ने एमजेन में 12 वर्षों तक काम किया और वाइस प्रेसिडेंट तक बनीं। रेशमा की इन तीन उपलब्धियों ने बायोटेक इंडस्ट्री को नई ऊंचाई दी 1. सिस्टिक फाइब्रोसिस: इस घातक फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों की औसत आयु, जो पहले 27 वर्ष थी, वर्टेक्स की दवाओं के कारण अब 70 वर्ष से अधिक होने का अनुमान है। 2. जीन-संपादन: वर्टेक्स ने दुनिया की पहली जीन-एडिटेड चिकित्सा ‘कैसगेवी’ को मंजूरी दिलाई। यह थैलेसीमिया जैसी बीमारियां अनुवांशिक स्तर पर ठीक करने की दिशा में कारगर है। 3. नशे का हल: जनवरी 2025 में रेशमा ने एक ऐसी दर्द निवारक दवा को स्वीकृति दिलाई जो अफीम पर आधारित नहीं है। इसे नशे की लत का समाधान माना जा रहा है।

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