वार्ड 10, 11 और 12 के लोग बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे, शहर की नई सरकार से लोगों को उम्मीद

भास्कर न्यूज|गिरिडीह नगर निगम चुनाव को लेकर क्षेत्र में चुनावी तापमान धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। मेयर, नगर पंचायत अध्यक्ष से लेकर वार्ड पार्षद तक के पदों के लिए उम्मीदवार पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि, इस चुनावी शोरगुल के बीच नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 10, 11 और 12 के निवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं और नई नगर सरकार से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। तीनों वार्डों के लोगों का कहना है कि चुनाव के समय उम्मीदवार वोट मांगने जरूर आते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। ऐसे में मतदाता इस बार ऐसे प्रतिनिधियों को चुनना चाहते हैं, जो केवल वादे ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान भी करें। वार्ड नंबर 10 में कई जगहों पर पक्की सड़कें नहीं वार्ड संख्या 10 के लोगों ने बताया कि उनके इलाके में कई जगहों पर अब तक पक्की सड़कें नहीं बनी हैं। बारिश के मौसम में सड़कों पर कीचड़ और जलजमाव के कारण खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राजदीप आर्यन, नरेश राय, सतीश झा, सुजीत कुमार, रामचंद्र वर्मा, इंद्रनारायण प्रसाद, कुलदीप कुमार, नीरज कुमार, मुकेश प्रसाद सहित अन्य लोगों ने बताया कि वार्ड में स्ट्रीट लाइट की भी भारी कमी है। सफाई व्यवस्था बेहद खराब है, लेकिन इसके बावजूद नागरिकों से नियमित रूप से होल्डिंग टैक्स वसूला जा रहा है। लोगों का कहना है कि टैक्स के बदले उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। वार्ड नंबर 11: सालोंभर रहती है पानी की समस्या वार्ड संख्या 11 के निवासियों की समस्याएं भी कुछ कम नहीं हैं। राजेश कुमार राम, महेंद्र राम, प्रदीप वर्मा, निर्मल महतो, राजेंद्र वर्मा, रीतलाल प्रसाद वर्मा, अर्जुन राय, फिरोज अंसारी, अमित साव, अजीज अंसारी, विश्वनाथ यादव, धनराज गोप सहित अन्य लोगों ने बताया कि पूरे वार्ड में एक भी सामुदायिक शौचालय नहीं है। वार्ड में एक स्वास्थ्य केंद्र तो मौजूद है, लेकिन आम जनता को उसका कोई विशेष लाभ नहीं मिल पा रहा है। पानी की समस्या सालभर बनी रहती है और कूड़ा-कचरा सड़कों पर बिखरा रहता है, जिससे गंदगी और बीमारी का खतरा बढ़ रहा है।

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