विकास आयुक्त बोले:रिम्स में एम्स की तर्ज पर हो एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, असिस्टेंट प्रोफेसर की शॉर्टलिस्टिंग अब ऑब्जेक्टिव मार्किंग सिस्टम से होगी

रिम्स में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक विकास आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि रिम्स में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली हर वर्ष नियमित रूप से की जाए। विकास आयुक्त ने कहा कि एम्स और देश के अन्य प्रमुख मेडिकल संस्थानों की तरह रिम्स में भी स्पष्ट और मानकीकृत एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया तय किया जाना चाहिए। इससे योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और चयन प्रक्रिया में किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग ऑब्जेक्टिव मार्किंग सिस्टम के आधार पर की जाए। इससे चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी। साक्षात्कार प्रक्रिया बनाई जाएगी सरल
बैठक में इंटरव्यू को लेकर भी नए विकल्पों पर चर्चा की गई। कहा गया कि साक्षात्कार की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। हालांकि यह इतनी प्रभावी भी हो कि अभ्यर्थियों के ज्ञान, अनुभव और क्षमता का समग्र मूल्यांकन किया जा सके। बैठक में नॉन-टेक्निकल स्टाफ और रिम्स नर्सिंग कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि संस्थान के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से चलते रहें।

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