विक्रम यूनिवर्सिटी में मनाया गया भारतीय भाषा उत्सव:स्टूडेंट्स से अपनी भाषा में हस्ताक्षर करने की हुई अपील; सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए

विक्रम विश्वविद्यालय में बुधवार को भारतीय भाषा उत्सव मनाया गया। विश्वविद्यालय की भारतीय भाषा समिति द्वारा आयोजित इस उत्सव में “विविध भाषा एवं संस्कृति संगम” का आयोजन हुआ। इस अवसर पर “मेरी भाषा, मेरा हस्ताक्षर” कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी भाषा में हस्ताक्षर करने के लिए जागरूक करने का अभियान प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत “मेरी भाषा, मेरा हस्ताक्षर” अभियान पर केंद्रित पोस्टर का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया। विविध भाषाओं और संस्कृति के रंग बिखेरे गए विक्रम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के दस से अधिक प्रांतों और क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने अपनी परंपरागत वेशभूषा में भाग लिया। उन्होंने अपनी-अपनी भाषा और संस्कृति का परिचय देते हुए नृत्य, संगीत और गीत प्रस्तुत किए। युवाओं ने मंच पर ओडिशा, बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान, मालवा, केरल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की भाषाओं और संस्कृति के रंग बिखेरे। “भाषा के समाप्त होने संस्कृति भी खत्म हो जाती है” कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु, प्रो. सी.जी. विजय कुमार मेनन ने कहा कि भारत की सभी भाषाओं में एकता का सूत्र विद्यमान है। संस्कृत का गहरा प्रभाव भारत की भाषाओं पर है, और ये भाषाएँ एक-दूसरे को जोड़ने का कार्य करती हैं। प्रो. अपर्णा भारद्वाज ने कहा कि वर्तमान समय में मातृभाषा को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। डॉ. स्नेहलता श्रीवास्तव ने कहा कि भाषा की प्रयोग क्षमता से मानव मस्तिष्क का विकास होता है। भारतीय चिंतन में “शब्द ब्रह्म” माना गया है। कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारत की मनोहर भाषाएँ सही मायने में भारत माता की वाणी हैं। भाषा का भूमि, जन और संस्कृति के साथ गहरा रिश्ता है, और ये सभी भाषाएँ आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। प्रो. गीता नायक ने कहा कि कई भाषाएँ विलुप्त हो चुकी हैं और कई विलुप्ति के कगार पर हैं। भाषा के समाप्त होने पर संस्कृति भी समाप्त हो जाती है। कार्यक्रम का स्वागत भाषण डीएसडब्ल्यू प्रो. एस.के. मिश्रा ने दिया। संचालन अंजलि उपाध्याय और अमृता शुक्ला ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन प्रो. संदीप तिवारी ने किया।

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