विजय गढ़ पंचायत में 2 करोड़ का घोटाला:ग्रामीणों ने सरपंच और रोजगार सहायक पर आरोप लगाए, कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मुरैना पोरसा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत विजयगढ़ में मनरेगा और वाटरशेड योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। पंचायत के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर मुरैना को लिखित आवेदन देकर सरपंच श्रीराम सखवार और ग्राम रोजगार सहायक नरेश सिंह के खिलाफ निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि महिला श्रमिकों और कई लोगों के नाम से फर्जी जॉब कार्ड बनाए गए, जबकि वे कभी काम पर मौजूद ही नहीं रहे। शिकायत में सुग्रीव, आशीष, नीतू, हकीम सिंह, रामनरेश, प्रेम सिंह, कुलदीप, मदन मोहन, नागेश, सुमित, सिया, सचिन कुमार, सुदामा सहित कई नामों का उल्लेख किया गया है। इन नामों पर मजदूरी दिखाकर सरकारी राशि निकाल ली गई। पौधरोपण, अमृत वाटिका, नाला और ई-कक्ष में गड़बड़ी शिकायत के अनुसार चारागाह विकास, पौधरोपण, वसुधा वंदन अमृत वाटिका और गोशाला के नाम पर महीनों तक फर्जी मजदूरी दर्शाई गई। पंचायत भवन के पास स्वीकृत ई-कक्ष निर्माण में तकनीकी नियमों की अनदेखी कर केवल दिखावे का निर्माण किया गया। वहीं श्मशान घाट से पोखर तक स्वीकृत नाला निर्माण के लिए 1.40 लाख रुपये निकाल लिए गए, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ। तालाब निर्माण में एक करोड़ से ज्यादा का भुगतान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परकोलेशन टैंक, अर्दन डेम और तालाब निर्माण से जुड़े लगभग 41 कार्यों में बड़ा घोटाला किया गया। पुराने तालाबों को नया बताकर वर्क कोड बदल दिए गए और वाटरशेड उपयंत्री हर्ष समाधिया की मिलीभगत से फर्जी मूल्यांकन कर करीब एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान निकाल लिया गया। बाहरी लोगों के नाम जॉब कार्ड बनाए ग्रामीणों का कहना है कि सबलगढ़, सुनावली, ग्वालियर, गोरमी और भिंड जैसे बाहर के इलाकों के लोगों के नाम फर्जी जॉब कार्ड बनाए गए। उनके बैंक खाते खुलवाकर एटीएम कार्ड अपने पास रखे गए और मजदूरी की राशि निकाली गई, जबकि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिला। पहले भी हटाया जा चुका है रोजगार सहायक आवेदन में बताया गया है कि ग्राम रोजगार सहायक नरेश सिंह को पहले भी जांच में दोषी पाए जाने पर 25 जून 2025 को जिला पंचायत मुरैना द्वारा पद से पृथक किया जा चुका है। जब सरपंच श्रीराम सखवार से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया। वहीं नवनियुक्त पंचायत सचिव गणेश सिंह तोमर ने माना कि पंचायत में भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन सरपंच द्वारा पुराना रिकॉर्ड नहीं सौंपे जाने के कारण वे फिलहाल आंकड़े नहीं बता पा रहे हैं। जनपद पंचायत पोरसा के सीईओ देवेंद्र जैन ने कहा कि सभी आरोपों की जांच कराई जाएगी। अगर भ्रष्टाचार पाया गया तो सरपंच और सचिव के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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