वैज्ञानिक चेतना को विद्यार्थियों के भीतर जागृत करने के उद्देश्य से शासकीय आशीबाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महासमुंद में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह दिन महान भारतीय वैज्ञानिक डॉ. सी.वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज की याद में मनाया जाता है, और विद्यालय की अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) में बच्चों की रचनात्मकता ने इस दिन को और भी यादगार बना दिया। अटल टिंकरिंग लैब, जो बच्चों के नवाचारों का केंद्र है, वहां सुबह से ही विद्यार्थियों की भारी भीड़ जुटी थी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और रचनात्मकता का विकास करना था। प्राचार्य जीआर सिन्हा ने कहा आज का दिन हमें याद दिलाता है कि विज्ञान किसी बंद कमरे या लैब की जागीर नहीं है। डॉ. सी.वी. रमन ने समुद्र के नीले रंग को देखकर सवाल किया था और उसी एक सवाल ने उन्हें नोबेल पुरस्कार तक पहुंचाया। मैं चाहता हूं कि हमारे छात्र क्यों और कैसे पूछना शुरू करें। जब आप सवाल करते हैं, तभी विज्ञान का जन्म होता है। हमारी अटल टिंकरिंग लैब आपकी कल्पनाओं को हकीकत में बदलने का माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां रंगोली केवल फूलों और रंगों का खेल नहीं थी, बल्कि छात्राओं ने रंगों के माध्यम से मानव हृदय, सौर मंडल और डीएनए की संरचना को जमीन पर उकेरा। हिमांशी टंडन ने अपनी कलाकारी से प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन के लिए एक निष्पक्ष निर्णायक मंडल बनाया गया था, जिसमें छाया रंगारी, डॉ. ज्योति किरण चंद्राकर, कीर्तन साहू और खेमलता कंवर शामिल रहीं। सिर्फ खिलौना बनाना नहीं, देश की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजना है: अटल टिंकरिंग लैब प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश ने कहा अटल लैब का मकसद सिर्फ खिलौने बनाना नहीं, समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजना है। आज हमारे बीच से निकले एटीएल एंबेसडर इस बात का प्रमाण हैं कि निरंतर प्रयास आपको नई पहचान दिला सकती है। विज्ञान दिवस मनाना तभी सार्थक है जब हम अंधविश्वास छोड़कर तार्किक सोच को अपनाएं। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रोविना दीवान ने विज्ञान के वरदान और अभिशाप को बखूबी दर्शाया, वहीं निबंध प्रतियोगिता में प्रशांत मल्होत्रा ने तार्किक लेखन से निर्णायकों को प्रभावित किया। भाषण प्रतियोगिता में भविष्य के भारत में विज्ञान की भूमिका विषय पर रागिनी साहू ने अपने ओजस्वी विचारों से प्रथम स्थान प्राप्त कर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का आकर्षण नवाचार प्रदर्शनी रही। इसमें डिगेश सेन, दुर्गेश साहू और हिमांशी टंडन ने वर्किंग मॉडल प्रस्तुत किए। किसी ने सौर ऊर्जा से चलने वाले संयंत्र का मॉडल दिखाया तो किसी ने कचरा प्रबंधन की नई तकनीक सुझाई। इन मॉडलों को देखकर निर्णायक मंडल के सदस्य भी हैरान रह गए। लैब प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश की देखरेख में आयोजित प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।


