MBA करने के बाद विदेशी बैंक में 12 साल नौकरी की। छोटा भाई लंदन शिफ्ट हुआ तो सालाना लाखों का पैकेज छोड़कर गांव लौट आए। फिर शुरुआत की डेयरी फार्म की। दो बीघा जमीन और गुजरात से 7 गिर गाय खरीदकर शुरू किया बिजनेस। दूध की क्वलिटी बेस्ट हो इसलिए गायों के लिए 5 बीघा जमीन में सुपर नेपियर घास भी लगाई। सात साल बाद आज डेयरी फार्म में 80 गायें और 80 बछड़े हैं। दूध और घी से महीने में करीब 4 लाख रुपए तक की कमाई हो रही है। म्हारे देश की खेती में आज बात बांसवाड़ा के MBA किसान अनुकूल मेहता की … जिले के ठीकरिया के रहने वाले अनुकूल मेहता (42) ने बताया- फाइनेंस में MBA करते ही 2008 में गुरुग्राम में बैंक ऑफ अमेरिका में नौकरी जॉइन की। इसके बाद 2010 में गुरुग्राम में ही HSBC से जुड़ गए। वर्ष 2012 में उन्हें सनकॉर्प बैंक में नौकरी का मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया में 6 महीने ट्रेनिंग के बाद वापस गुरुग्राम लौटे। उनका पैकेज करीब 25 लाख रुपए का था। साल 2015 में उनके छोटे भाई अनमोल (40) लंदन शिफ्ट हो गए। वे ब्लैकरॉक कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट हैं। इसके बाद गुरुग्राम में वे अकेले रह गए थे। गांव में पिता वीरेंद्र मेहता (71 और मां कश्मीर मेहता (65) भी अकेले थे। दोनों ही गवर्नमेंट जॉब से रिटायर हो चुके थे। माता-पिता की भी इच्छा थी कि बेटा उनके पास रहे। इसी बीच 2016 में बांसवाड़ा में गुरु माता जी आरिका पूर्णमति माता का विहार हुआ। वहां उन्हें गौ-सेवा का आशीर्वाद मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। सात बीघा में है डेयरी फार्म अनुकूल ने बताया- गुरु माता जी की प्रेरणा से 2016 में दो बीघा जमीन खरीदी। छोटे भाई के नाम पर ‘अनमोल गिर गौशाला’ रखा। करीब एक साल तक डेयरी निर्माण कार्य चला। इसके बाद चारे की व्यवस्था के लिए पांच बीघा अतिरिक्त जमीन खरीदी, जिस पर सुपर नेपियर घास लगाई गई, जो लगभग 10 साल तक उत्पादन देती है। घास को उगाने में केवल गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग किया जाता है। शुरुआत में बाउंड्री वॉल, टीन शेड, फेंसिंग और चारा स्टोरेज जैसे कार्यों पर करीब 70 लाख रुपए खर्च किए गए। सात गायों से 160 गायों तक का सफर अनुकूल बताते हैं- 2017 में नवरात्र के अवसर पर अनमोल गौशाला के नाम से गिर गाय डेयरी की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने गुजरात से सात गिर गायें खरीदीं। एक गाय की कीमत लगभग 75 हजार रुपए थी। कुल मिलाकर करीब छह लाख रुपए खर्च हुए। डेयरी शुरू करने के लिए उन्होंने एक करोड़ रुपए का बैंक लोन लिया और करीब साढ़े सात लाख रुपए का नाबार्ड लोन भी लिया। आज उनकी डेयरी में कुल 80 गायें हैं, जिनमें से 45 वर्तमान में दूध दे रही हैं। इसके अलावा 80 बछड़े भी हैं। गिर गाय औसतन करीब 7 लीटर दूध प्रतिदिन देती है। वर्तमान में डेयरी से रोजाना करीब 300 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध को निकालकर बिना प्रोसेस किए सीधे बोतल में पैक कर सप्लाई किया जाता है। प्रति लीटर 90 रुपए को भाव मिल रहा है। तीन साल पहले लगाई घी प्रोसेसिंग यूनिट साल 2022 में, करीब तीन साल पहले, घी प्रोसेसिंग का सेटअप भी तैयार किया। वर्तमान में हर महीने लगभग 30 लीटर घी तैयार किया जाता है, जिसकी बाजार में कीमत करीब 2750 रुपए प्रति लीटर है। शुद्ध देसी घी की बढ़ती मांग के चलते उन्हें अच्छा मुनाफा हो जाता है। 18 लोगों को मिल रहा रोजगार अनुकूल बताते हैं- डेयरी फार्म में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में यहां 18 कर्मचारी हैं, जिन्हें प्रतिमाह लगभग दो लाख रुपए वेतन के रूप में दिए जाते हैं। स्टाफ रोजाना गायों को चारा डालने, दूध निकालने, दूध की पैकेजिंग और सप्लाई का कार्य संभालता है। फार्म परिसर में दूध पैकेजिंग के साथ-साथ कर्मचारियों के काम करने और रहने की भी व्यवस्था की गई है। गायों की पहचान के लिए टैगिंग, नस्ल सुधार पर काम अनुकूल बताते हैं- गायों की देखभाल के लिए चार बाड़े बनाए गए हैं, जिनमें दूध देने वाली, नहीं देने वाली, गर्भवती गायें और बछड़ों को अलग-अलग रखा जाता है। गायों की पहचान के लिए टैगिंग की गई है, जिसके आधार पर गायों की सभी जानकारियां कंप्यूटर में एंट्री की जाती हैं। इसमें कृमिनाशन (दवाई), प्रजनन (ब्रीडिंग), हीट (गर्भधारण प्रक्रिया) और संभावित प्रसव तिथि सहित सभी जानकारी रिकॉर्ड की जाती है। इसके अलावा पूरा खाने का शेड्यूल रहता है। कौन-कौन सी जड़ी-बूटियां और ताजा हरा चारा दिया जाना है, यह सब बोर्ड पर लिखा रहता है, ताकि काम करने वालों को कोई परेशान न हो। इसके अलावा फार्म में गायों की नस्ल सुधार पर भी काम किया जा रहा है। ब्रीडिंग के लिए गिर नंदी से क्रॉस करवाने के लिए बेस्ट गिर सीमन का उपयोग किया जाता है। रोजाना सुबह 4.30 बजे ही उठ जाते हैं अनुकूल मेहता ने बताया- कॉरपोरेट दुनिया में आर्थिक स्थिरता थी, लेकिन मन का संतोष नहीं था। अब माता-पिता के साथ रहकर गौ सेवा से अच्छा लगता है। डेली सुबह 4.30 बजे उठने के बाद रात 8 बजे तक गौशाला में ही रहता हूं। अधिकांश समय वहीं रहता हूं, ताकि गायों की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकूं। — खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में किसान ने उगा दी अमेरिकन केसर:एनर्जी बढ़ाने वाली एक ‘जड़’ से लाखों में होगी कमाई, डिमांड में है ये औषधि राजस्थान में केसर? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन ये सच है। हालांकि, ये केसर कश्मीर की वादियों वाला केसर नहीं है। ये है अमेरिकन केसर। पूरी खबर पढ़िए


