विधानसभा में टोल टैक्स की अधिक वसूली पर उठे सवाल‎:6 साल में कंपनियों ने जिन रोड पर 600% अधिक तक टोल वसूला, उन्हीं पर दुर्घटनाओं में ज्यादा मौतें

मप्र की सड़कों पर सफर महंगा और असुरक्षित होता जा रहा है। विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में सामने आया है कि कई प्रमुख फोरलेन सड़कें अपनी निर्माण लागत से कई गुना ज्यादा टोल वसूल चुकी हैं। कुछ प्रोजेक्ट्स में 600 फीसदी तक वसूली हो चुकी है। इसके बावजूद 12 साल तक टोल से राहत की संभावना नहीं है। आंकड़ों के अनुसार जावरा-नयागांव फोरलेन पर 618.84%, लेबड़-जावरा फोरलेन पर 403.59% और भोपाल-देवास मार्ग पर 481.5% राशि वसूली जा चुकी है। ग्वालियर-भिण्ड मार्ग पर 186% और रीवा-हनुमना मार्ग पर 114% वसूली दर्ज की गई है। यानी इन सड़कों से लागत से कहीं अधिक रकम कंपनियां वसूल चुकी हैं। भोपाल बायपास का मामला भी सवालों में है। 12 दिसंबर 2019 से दिसंबर 2025 तक यहां 284.33 करोड़ रुपए टोल वसूला गया। इसी अवधि में रखरखाव और प्रबंधन पर 94.52 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इससे पहले कंपनी ने करीब 241.97 करोड़ रुपए की वसूली की थी। विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सवाल उठाया कि कंपनी को हर साल 21 करोड़ रुपए प्रीमियम देना था। छह साल तक यह प्रीमियम क्यों नहीं वसूला गया। जब वसूली सरकार कर रही है तो टोल गेट पर निजी कंपनी के बोर्ड अब भी क्यों लगे हैं। उधर, इन्हीं सड़कों पर लगातार हादसे हो रहे हैं। हजारों वाहन चालक जान गंवा चुके हैं। पांच टोल रोड और इनमें हादसों में हुई मौतें 1. लेबड़–जावरा फोरलेन : निर्माण लागत 589.31 करोड़ रुपए थी। जनवरी 2026 तक कंपनी यहां से 2378.43 करोड़ वसूल चुकी है। लागत का लगभग 403% अधिक। इसी सड़क पर 6 साल में 4,123 दुर्घटनाओं में 2225 मौतें हुईं। 2. जावरा-नयागांव फोरलेन : लागत 425.71 करोड़ रुपए थी। अब तक कंपनी 2634.46 करोड़ रुपए यानी लागत का 618% से भी अधिक वसूल चुकी है। इस मार्ग पर बीते 6 साल में 3,696 दुर्घटनाएं और 1,281 मौतें हुईं। 3. भोपाल-देवास मार्ग : इस सड़क बनाने वाली कंपनी ने 426.64 करोड़ रुपए खर्च किए थे। बीते 6 साल इस टोल से 2054.42 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है। यानी निवेश का करीब 481%। इसी टोल रोड पर 2,872 दुर्घटनाएं हुई हैं और इनमें से 315 लोगों की मौत हो चुकी है। 4. ग्वालियर-भिण्ड मार्ग: लागत 302.53 करोड़ रुपए थी। 564.36 करोड़ वसूले जा चुके हैं, जो लागत का 186% है। इसी अवधि में यहां 4,727 दुर्घटनाएं हुई हैं और इनमें से 1,503 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। 5. खलघाट-मनावर मार्ग: जनवरी 2026 तक कुल 20.19 करोड़ टोल वसूला जा चुका है। निर्माण लागत 19.49 करोड़ रुपए थी। यहां 6 साल में 925 दुर्घटनाएं हुई और 277 मौतें दर्ज की गई।

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