‘विधानसभा में तुम्हारा भाई टेबल थपथपाकर मुद्दा सुलझा देगा’:विधायक भाटी बोले- अब सिर देने की जरूरत नहीं, इस लोकतंत्र में माथा गिनते हैं

बाड़मेर जिले के शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ओरण बचाओं पदयात्रा जोधुपर पहुंचने पर उनके साथ में शामिल होकर पैदल चले। जोधपुर के हनुमत हॉस्टल में भाटी ने कहा- हमें ओरण को बचाने की बात लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचानी है। अगर शांति और लोकतांत्रिक से काम नहीं बना, तो हम दूसरे रास्ते अपनाएंगे। उस स्थिति में हम सुमेर सिंह और उनकी टीम को पीछे कर देंगे। आज बड़ी संख्या में जोधपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर ओरण को बचाने के लिए अपनी आवाज बुलंद करें। आप चिंता मत छोड़िए, विधानसभा में आपका यह भाई टेबल थप-थपाकर इस मुद्दे को सुलझा देगा। एक दौर था ओरण, गोचर को बचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने सिर दिए थे। लेकिन अब सिर देने की जरूरत नहीं है इस लोकतंत्र में माथा (सिर) गिनाने की जरूरत है। सब लोग एक होकर अपनी बात रखेंगे तभी उसका परिणाम निकलेगा। दरअसल, जैसलमेर स्थित तनोट माता मंदिर से 21 जनवरी को शुरू हुई ओरण बचाओ पदयात्रा रविवार रात को जोधपुर पहुंची। यह पदयात्रा सुमेर सिंह और भोपाल सिंह के नेतृत्व में जयपुर की ओर बढ़ रही है। पूरी यात्रा में लगभग 725 किलोमीटर दूरी तय की जाएगी। यात्रा में 10 साल के बच्चों से लेकर 75 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। पदयात्रा का उद्देश्य ओरण भूमि को ‘विकास’ के नाम पर खत्म होने से बचाना है। स्थानीय लोग इसे पूर्वजों की विरासत और पर्यावरण संरक्षण का आधार मानते हैं। मारवाड़ की आन, बान शान बचाने की लड़ाई है जोधपुर के हनमत हॉस्टल में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा- ओरण बचाने की लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है, किसी जाति या धर्म की नहीं है। यह लड़ाई मारवाड़ की आन, बान और शान बचाने की है। यह बुजुर्ग और युवा साथी बीते 30-35 दिनों से पैदल घूम रहे हैं। तनोट जैसलमेर से रवाना हुई यात्रा आज जोधपुर पहुंची है। मुश्किल दिन इन्होंने निकाले हैं। आज यह लोग यहां पर पीले चावल देने के लिए आए हैं। यह कहने आए कि सोमवार यानि आज आने का आने का न्यौता दो और इस यात्रा में शामिल होकर ज्यादा नहीं तो दो-तीन किलोमीटर तक साथ चले। पूर्वजों ने सिर दिए लेकिन हमें माथा गिनाना है स्पीच में भाटी ने कहा- डालमिया कंपनी अलांट जमीन को किया खारिज विधायक ने कहा- डालमिया कंपनी को अनैतिक तरीके से जमीनें अलांट हुई है। विधानसभा में इसका मुद्दा उठाया तो हाथों हाथ बैक डेट में आदेश निकालकर जमीन को पूरी तरीके से खारिज कर दी। इस पदयात्रा में युवाओं के साथ 75-75 साल के बुजुर्ग शामिल है। इनके साथ में हनमंत हॉस्टल से पावटा तक 2-3 किलोमीटर तक चलना है। अगर कोई युवा इनकी पदयात्रा में शामिल होना चाहते है तो जयपुर तक साथ में चलें। विधायक बोले- पूर्वजों ने माथे दिए है हमें केवल माथे गिनाने है भाटी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट संदेश देना है कि अगर ओरण और गोचर पर आंच आई तो हमारे पूर्वजों ने माथे दिए थे। आज के युवा भी माथा देने में कोई कमी नहीं रखेगें। आज शांतिपूर्ण तरीके से पदयात्रा में शामिल होना है। कई तमाम चीजें, कई संगठन लगेंगे की इस पदयात्रा को तहस-नहस किया जाए। अपन लोगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे तक पहुंचानी है। लोकतांत्रिक तरीके से पहुंचे तो ठीक नहीं तो दूसरे तरीके से हम करें देंगे। सुमरेसिंह (पदयात्रा का नेतृत्व करने वाले) को इनको पीछे होने का बोल देंगे।

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