विधायक जीवनजोत ने फोकल प्वाइंट में फायर स्टेशन तैयार कराने का किया था दावा, ढाई साल से एक ईंट तक नहीं लगी

भास्कर न्यूज | अमृतसर ​ईस्ट हलके की विधायक जीवनजोत कौर ने फोकल प्वाइंट में फायर स्टेशन तैयार कराने का दावा किया था, लेकिन ढाई साल बाद भी बिल्डिंग तैयार करना तो दूर एक ईंट तक नहीं लग पाई है। हैरानीजनक है कि सुविधाओं से लैस फायर स्टेशन बनाने के लिए करीब 1.83 करोड़ का फंड भी जारी हो चुका है लेकिन पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन विभाग से लैंड हैंडओवर नहीं करवाया जा सका है। जबकि विधायक जीवनजोत ने इंडस्ट्री विभाग की इसी बिल्डिंग के एक कमरे और पुरानी गाड़ी के भरोसे अस्थाई तौर पर फायर स्टेशन का उद्घाटन बीते 16 सितंबर 2023 में किया था। तब उन्होंने दावा किया था कि ढाई करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया गया है। जल्द ही सुविधाओं से लैस फायर स्टेशन तैयार कराया जाएगा। पूर्व चेयरमैन बस्सी ने कहा कि बारिश के मौसम में सीवेज का पानी दफ्तर के अंदर घुस जाता है। यही नहीं सांप देखे जाने की चर्चा भी है। दमकल की गाड़ियां भी बिना शैड के खराब हालत में खड़ी हैं। छत से रिसाव के कारण बिजली के तार और स्विच बोर्ड नमी की चपेट में है जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है। किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है। चुनाव से पहले कच्चे (संविदा) कर्मचारियों को पक्का करने के वादे किए गए थे, लेकिन सरकार अब अपने वादों से पीछे हट रही है। सेवा में अपनी जान जोखिम में डालने वाले कर्मचारियों को तुरंत नियमित किया जाना चाहिए। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व कांग्रेस चेयरमैन दिनेश बस्सी अपने समर्थकों के साथ मंगलवार को फोकल प्वाइंट पहुंचे और फायर स्टेशन के जर्जर हालातों बारे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधायक जीवनजोत ने इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था। आरजी तौर पर उद्घाटन करा वाहवाही भी लूटी लेकिन मुलाजिमों को सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर कोई काम नहीं कराया जा सका। बिल्डिंग की हालत जर्जर हो गई है। छत से कंक्रीट गिर रहा है तो दीवारों में दरारें आ गई हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और कार्यालय परिसर में बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले अग्निशमन कर्मी खुद एक असुरक्षित ढांचे में काम करने को मजबूर हैं। 1.83 करोड़ रुपए का फंड जारी होने के बाद भी फायर स्टेशन तैयार नहीं कराना भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। मामला निगम कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल व एफएसओ दिलबाग सिंह फायर ब्रिगेड विभाग की नोटिस में लाया गया मगर चुप रहना जरूरी समझा।

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