विवादित लग्जरी अपार्टमेंट में नेता पुत्र का गृह प्रवेश:महिला आईएएस के खिलाफ जांच की आंच; किसने आधी रात को सत्ताधारी नेताओं से बात की?

राजधानी की एक लग्जरी हाउसिंग बिल्डिंग को लेकर मौजूदा सत्ताधारी पार्टी के पिछले राज में खूब विवाद हुआ। मामला चुनावी मुद्दा तक बना, लेकिन बाद में सब सेटल हो गया। जिस बिल्डिंग में सत्ता वाली पार्टी ने घोटाले के आरोप लगाए, बाद में उसे उनके ही राज में क्लीन चिट भी मिल गई। अब सत्ता वाली पार्टी के एक बड़े नेता के बेटे ने इसी बिल्डिंग में करोड़ों का लग्जरी अपार्टमेंट लिया। नेता पुत्र अब इसके स्थायी निवासी बन चुके हैं। सियासी गलियरों में इसे लेकर अब तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। नेता और पुत्र अच्छे कारोबारी हैं। उन्होंने पैसा देकर ही अपार्टमेंट खरीदा है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में रहने वाले सवालों-चर्चाओं से कैसे बचेंगे? महिला आईएएस के खिलाफ जांच की आंच जिस तरह जल में रहकर मगर से बैर भारी पड़ता है उसी तरह सरकार में रहकर सीनियर से बैर भी भारी पड़ता है। सेहत का जिम्मा संभालने वाले महकमे में सीनियर और जूनियर महिला आईएएस के बीच लंबे समय से जारी कोल्ड वॉर पिछले दिनों थमता सा दिखा। जूनियर के तेवर अचानक ठंडे दिखे। लंबे समय बाद जूनियर आईएसस सीनियर की अध्यक्षता वाली बैठकों में जा रही हैं। यह बदलाव यूं ही नहीं आया है। इसके पीछे भी ठोस वह है। महकमे से जुड़े टेंडर के मामले में जूनियर के खिलाफ जांच के आदेश हो गए हैं। जांच सीनियर को दी गई है। अब तक दोनों के बीच तलवारें खिंची हुई थीं, अब सीनियर जांच कर रही हैं। सबको जांच के नतीजों का इंतजार है। जूनियर के अचानक बदले हुए तेवरों के पीछे जांच की आंच को कारण बताया जा रहा है। जांच की आंच ने ही बर्फ को पिघलाया है। विपक्षी पार्टी के किन नेताओं ने आधी रात को सत्ताधारी नेताओं से बात की? विपक्षी पार्टी के संगठन मुखिया ने हाल ही अपनी ही पार्टी के नेताओं पर सत्ता वाली पार्टी से मिले होने का सार्वजनिक मंच से आरोप जड़ा तो मौके पर ही सुगबुगाहट शुरू हो गई। संगठन मुखिया ने जब आधी रात को सत्ता वाले नेताओं से बात करने वालों की पार्टी को जरूरत नहीं होने की बात कही तो अटकलें लगाने वालों को काम मिल गया। मंच पर बैठे कुछ नेताओं के चेहरे भी देखने लायक थे। विपक्षी पार्टी में अंदरूनी खेमेबंदी तो आभूषण की तरह है। सुना है सत्ता वाली पार्टी से सोहार्द रखने वालों नेताओं की लिस्ट ऊपर तक पहुंचाई गई है। उसमें विरोधी खेमे के कई नेताओं के नाम बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है यह बात यूं ही नहीं कही गई है। अब सियासी समीकरण इतने भी आसान नहीं होते कि हर कोई समझ जाए। संगठन मुखिया के कार्यक्रम से विधायक नदारद पिछले दिनों विपक्षी संगठन मुखिया और नेता प्रतिपक्ष गोडवाड़ के एक चर्चित जिले के दौरे पर गए। पार्टी दफ्तर का उद्घाटन था, इसलिए पड़ौसी जिले तक से नेता आए लेकिन उस जिले में विपक्षी पार्टी के दोनों विधायक नदारद थे। दोनों विधायकों ने नहीं आने के अपने कारण बताए लेकिन असली कारण कुछ और ही था। दोनों विधायक पूर्व मुखिया के विरोधी खेमे के हैं। पूर्व मुखिया के बेटे ने जब चुनाव लड़ा था तल्खियां उस वक्त से और बढ़ गईं। जिस पार्टी दफ्तर का लोकार्पण था, वहां जिले के विधायकों से ऊपर पूर्व मुखिया के बेटे का नाम लिखा था। बस नाम पट्टिका के इस नाम को लेकर ही दोनों विधायक नाराज हो गए और कार्यक्रम में ही नहीं गए। अब जितने मुंह उतनी बाते हैं लेकिन विपक्षी पार्टी में इस घटना की गूंज और इसके रिएक्शन लंबे समय तक देखे जाएंगे। नदियों को बांधने वाले महकमे में प्रमोशन में जादूगिरी नदियों के पानी को बांधकर रखने वाले महकमे में इन दिनों प्रमोशन को लेकर भारी विवाद हो रहा है। प्रमोशन में जिस तरह की जादूगरी दिखाई उसे लेकर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले उबाल पर हैं। महकमे में डिप्लोमाधारी और इंजीनियरिंग किए हुए दो तरह के इंजीनियर हैं। नियमों के हिसाब से आधे पद खाली होने पर ही जूनियर इंजीनियरों के प्रमोशन हो सकते हैं, इसके लिए तरकीब निकाली गई। इंजीनियरिंग डिग्रीधारी जूनियर इंजीनियरों को दूसरे महमे में डेपुटेशन पर भेज दिया, इस तरह पद खाली हो गए और फिर डिप्लोमा वालों को प्रमोशन कर दिया। अब इस जादूगिरी पर विवाद तो होना ही था। मामला टॉप तक पहुंचाया गया है। शहरी निकायों में हजारों डेपुटेशन पर क्यों उठे सवाल? सरकारी महकमों में भर्ती से लेकर ट्रांसफर पोस्टिंग तक कोई काम बिना विवाद हो जाए अब ऐसा संभव नहीं लग रहा। अब प्रदेश के शहरी निकायों में खाली पदों पर साढे़ तीन हजार से ज्यादा पदों पर डेपुटेशन से नियुक्तयों का मामला विवादों में आ गया। इसे लेकर ढेरों शिकायतें मिल रही है। कहा जा रहा है कि तीन दिन में ही हजारों इंटरव्यू पूरे कर प्रोसेस पूरा कर लिया। अब जब गुपचुप इंटरव्यू और डेपुटेशन होंगे तो सवाल उठने स्वाभाविक है। महकमे के मंत्री तक तक को जानकारी नहीं थी। अब कुछ जागरूक नागरिक और दावेदार पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठा रहे हैं। महकमे के मंत्री से लेकर कई जगह शिकायतें कर रहे हैं। मामला ऊपर तक भी पहुंचाया गया है, आगे अब एक्शन का इंतजार है। सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सत्ताधारी नेता पंडित-ज्योतिषियों के यहां क्यों लगा रहे चक्कर?:बड़े लीडर ने नाम पुकारा, गायब थे नेता प्रतिपक्ष; अफसरों के सामान से भरे ट्रक चर्चा में

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *