विश्व परिदृश्य पर चमकता ऑपरेशन सिंदूर-मनोज द्विवेदी
अनूपपुर। पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार के कुशल नेतृत्व में भारत की वीर समेकित सेना (जल, थल, वायु) ने पाकिस्तानी आंतकवादियों के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर 1 और 2 का परिणामदायक संचालन करके वैश्विक परिदृश्य पर इसकी चनक को स्थापित किया है। शनिवार 10 मई को विदेश मंत्रालय और सेना के नियमित ब्रीफ में 7 मई को पाकिस्तान के 9 आतंकी ट्रेनिंग सेंटर में मारे गये 100 से अधिक आतंकवादियों के साथ शीर्ष पांच आतंकवादियों के नाम उजागर किये। कुछ घंटे बीतने के बाद भारत सरकार ने ऐलान कर दिया कि अब भारत पर हुए किसी भी आतंकवादी हमले को भारत के विरुद्ध युद्ध माना जाएगा। इसका सीधा मतलब था कि आतंकवादी हमले के बाद डोजियर की रणनीति समाप्त और सेना के सीधे एक्शन की रणनीति लागू। ऐसा करने में भारत को 75 साल लग गये।पाकिस्तान के विरुद्ध अब हम हमेशा युद्ध के लिये तैयार है। सेना के दोनों हाथ हमेशा खुले और शक्तिशाली, निर्णायक हथियारों से सज्ज होगे आक्रमण के लिये। इसके बाद भारत की शर्तों पर सीजफायर का ऐलान किया गया। ऐसा सीजफायर …जिसके दूरगामी परिणाम को समझने वाले लोगों के मुंह से बरबस ही निकल पडा कि नरेन्द्र मोदी ! तुसी ग्रेट हो जी।
तुसी ग्रेट हो जी नरेन्द्र मोदी
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर साबित किया है कि अमेरिका सहित दुनिया के शीर्ष नेताओं की योजना ,उनके विचार जहां खतम हो जाते हैं , मोदी वहाँ से शुरु करते हैं। पहलगाम के बाद उनके सभी निर्णयों ने दुनिया को चैंकाया है। आतंकवादी देश पाकिस्तान में 7 मई को आंतकवादियों के 9 से अधिक ठिकानों को नष्ट करने और 5 शीर्ष आतंककियों सहित 100 आतंकवादियों को उन्ही के गढ में घुस कर मारने के बाद बिना एक बयान दिये भारत के कुशल नेतृत्व की भारतीय सेना ने पाकिस्तान को चार दिन तक धूल धूसरित किया । आंकलन है कि उसके सैन्य संस्थानों को बड़ा नुकसान हुआ है। डीजीएमओ पाकिस्तान के निवेदन और अमेरिका के तथाकथित दखल के बाद 10 मई को सीजफायर की जब घोषणा की गयी तो उसके अलग अलग अर्थ निकाले गये। आम भारतीय ने पाकिस्तान पर किसी तरह का रहम करना पसंद नहीं किया, उसे कुत्ते की पूंछ बतलाते हुए सीजफायर की घोषणा से नाराजगी व्यक्त की। सायं 7-8 बजते बजते देश के सभी पश्चिमी राज्यों से पाकिस्तान के सीज फायर के उल्लंघन की खबरें आने लगीं, तब सीजफायर के समझौते को लेकर मोदी सरकार की रणनीति स्पष्ट हो गयी। भारत सरकार को इसका अंदाजा था। इस तरह से मोदी ने इस एक सीजफायर से कई निशाने लगा लिये हैं। दुनिया के स्वयमेव मुखिया बने ट्रंप को पाकिस्तान की हैसियत दिखलाना और इसके माध्यम से ट्रंप को दुनिया में उनकी वास्तविक स्थिति के अवगत कराना। पाकिस्तानी सेना ने अपनी सरकार की बात नहीं मानी। सीज फायर उल्लंघन पाकिस्तानी सेना के आतंकवाद प्रेम को दुनिया के सामने उजागर करने में भारत सफल रहा है। सीजफायर उल्लंघन के बाद अब भारतीय सेना पाकिस्तान का पुख्ता इलाज करने को स्वतंत्र है। पाकिस्तान ने आईएमएफ से सहयोग मिलने के बाद सीजफायर उल्लंघन किया है। जाहिर है उसे यहाँ से मदद अब आसान नहीं होगा। सीजफायर का श्रेय लेने अमेरिका के आगे आते ही चीन खुल कर पाकिस्तान के साथ आ खडा हुआ। साफ है कि आतंकवाद को चीन का सीधा समर्थन साबित हो गया। मतलब भारतीय नेतृत्व को पता था कि पाकिस्तान सेना अपने ही पाले आतंकवादियों के दबाव में अपने प्रधानमंत्री की बात मानेगी नहीं और वो अंतर्राष्ट्रीय मंच बिल्कुल एक्सपोज हो चुका होगा। यह आशंका भी है कि पाकिस्तान में अब कभी तख्तापलट हो सकता है।
देश प्रथम की भावना हुई मजबूत
सीजफायर से सरकार की किरकिरी हो सकती है, यह जानते हुए देश हित में निर्णय लिया गया। ऐसा लगा मानो नरेन्द्र मोदी की अन्तर्रात्मा कह रही है कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरा आकलन किस नजरिये से करता है। मेरी जवाबदेही भारत देश, सच्चे भारतीयों, यहाँ के समाज और भारत के सुरक्षा के प्रति है। मैं अपने कार्यो, अपनी विचारधारा ,अपने लोगों के लिये जिम्मेदार हूँ। यदि लोग इसे पसंद करते हैं तो हम एक साथ हैं। यदि आप पसंद नहीं करते तो ये आपकी समस्या है। आज भारत विश्व स्तर पर जापान को पीछे छोड़ कर चैथी बडी शक्ति है। पिछले दस साल में भारत वैश्विक स्तर पर जिस मजबूती से उभर कर स्थापित हुआ है, वह किसी बड़े देश को हजम नहीं हो रहा। पहलगाम हमला भारत को युद्ध और धार्मिक वैमनस्यता के झगड़े में खींच कर लाने की साजिश थी। भारत का शीर्ष नेतृत्व इसे भली भाँति समझ रहा है, देश के प्रबुद्ध जिम्मेदार लोग भी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रत्येक निर्णय लेते समय जिम्मेदारी, परिपक्वता, गंभीरता का परिचय दिया है।


