विश्व मातृभाषा दिवस के मौके पर शनिवार को राज्य स्तरीय उपवास रखा गया और कलेक्ट्रेट के आगे धरना दिया गया। एसडीएम सोजत को मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में राजस्थानी भाषा को शीघ्र मान्यता की मांग रखी गई। राजस्थानी मोट्यार परिषद की ओर से कलेक्ट्रेट के आगे दिए धरने में पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी ने कहा कि राजस्थान प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक हक है राजस्थानी भाषा की मान्यता, केंद्र सरकार दस करोड़ लोगों की जनभावनाओं का अनादर कर रही है,तुरन्त ही मान्यता के प्रस्ताव को पास कर राजस्थान की संस्कृति, रोजगार को बचाना चाहिए। पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने कहा कि राजस्थानी भाषा का इतिहास बहुत पुराना है, इतनी समृद्ध भाषा की मान्यता के लिए लोगों को आंदोलन करना पड़ रहा है इससे शर्म की बात राजस्थान की जनता के लिए क्या होगी, राजस्थान सरकार ने 2003 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर दिया था अब तो केंद्र सरकार को इस प्रस्ताव की सुध लेनी चाहिए। राजस्थानी मोट्यार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शिवदान सिंह जोलावास ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता से लाखों रोजगार पैदा होंगे। प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ गौरी शंकर प्रजापत ने कहा कि निर्धारित मापदंडों पर राजस्थानी भाषा खरी उतरती है फिर भी सरकारों ने इसे फुटबाल बना रखा है। संभाग अध्यक्ष डॉ हरिराम बिश्नोई ने कहा कि किसी भी प्रदेश का अस्तित्व, पहचान उसकी मातृभाषा पर आधारित होता है। साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि मान्यता नही मिली तो आने वाले कुछ ही वर्षों में इसके अस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएंगे। शंकर सिंह राजपुरोहित, छात्र नेता कृष्ण कुमार गोदारा, हरिराम गोदारा, हिमांशु टाक आदि ने विचार प्रकट किए। धरने में उदयपुर, नागौर, बाड़मेर, सीकर, गंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर आदि से भाषा समर्थक पहुंचे। कमल रंगा, बुलाकी शर्मा, क़ासिम बीकानेरी, गिरिराज पारीक, इन्द्रा व्यास, जुगलकिशोर पुरोहित, डॉ. नरसिंह बिन्नानी, ज़ाकिर अदीब, वली गौरी, पुनीत कुमार रंगा मौजूद रहे।


