हरिदासी परंपरा टटिया स्थान (वृंदावन) की तरह जयपुर में ठाकुरजी की सेवा-पूजा होती है। यह मंदिर खालसा कॉलोनी स्थित निकुंज वशिष्ठ भवन में है, जहां 12 साल से ठाकुरश्री किशोरी लाल जू विराजमान हैं। पहले श्रीधाम वृंदावन में रमण बिहारीदास महाराज सेवा करते थे। बाद में हरिदासी परंपरा की शिष्य सेवा के तहत जयपुर में विराजमान किया गया। सेवादार राघव वशिष्ठ ने बताया कि यहां पर 45 दिन तक होली उत्सव मनाया जाता है। सबसे खास बात यह कि ठाकुरजी के साथ बसंत पंचमी से धुलंडी तक रोजाना गुलाल व फूलों से होली खेली जाती है। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक 8 दिन तक श्रीजी की कटि (कमर) पर गुलाल की पोटली बांधते हैं। वहीं, कपोल गुलाल से मंडित किए जाते हैं। साथ ही होरी रंग महल में खेलत है पिय प्यारी… जैसे ब्रज पदों का गायन कर फाग खेला जा रहा है। ठाकुरजी के होली उत्सव के दौरान गुलाल की पोटली इसलिए बांधी जाती है कि जब ठाकुरजी हाथों में गुलाल लेकर होली खेलते हैं और खत्म हो जाती है, उसके बाद अचानक से पोटली से गुलाल लेकर रंग डालते हैं। ठाकुरजी होली के खिलाड़ी हैं, इस वजह से उनके कपोल पर ही गुलाल लगाई जाती है। ठाकुरजी के मंगला नहीं होती है। मान्यता है कि ठाकुरजी प्रतिदिन रात्रि में रास खेलने जाते हैं, इसलिए 10:30 बजे शृंगार आरती व शाम को शयन आरती होती है।


