दस दिन पहले ई-अटेंडेंस की पोर्टल रिपोर्ट से 3455 शिक्षकों के स्कूल पहुंचने की पुष्टि हो रही थी और 109 की वापसी की। अधिकारियों के बार-बार कहने के बाद भी जब 100 दिन में हालात नहीं सुधरे तो उन्होंने नवंबर का वेतन रोक दिया। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। हालात तेजी से बदल रहे हैं। मंगलवार की ई-अटेंडेंस रिपोर्ट के हिसाब से 9,014 कर्मचारियों में से 6464 स्कूल पहुंचे और वापसी भी 6140 की हुई। पहले ई-अटेंडेंस 52%कर्मचारी लगा रहे थे। यह संख्या अब 81%तक पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि 29 नवंबर को स्कूल जाने वाले कर्मचारी 4228 थे और लौटने वाले 109 शिक्षक-कर्मचारी। मुरार बीईओ अशोक दीक्षित ने कहा कि उनके क्षेत्र में 3404 कर्मचारी, शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें से 1602 का पूरा वेतन उनके खाते में पहुंच गया है। ये वे कर्मचारी हैं जिन्होंने हर दिन ई-अटेंडेंस लगाई है या वे जनगणना, एसआईआर आदि के काम में लगे हैं। ब्लॉक के 9 कर्मचारी निलंबित रहे हैं और 28 लंबे चिकित्सा या अन्य तरह के अवकाश पर। उन्होंने कहा कि भृत्य व क्लर्क को ई-अटेंडेंस न लगाने के बाद भी नवंबर का वेतन इस चेतावनी के साथ दे दिया गया है कि इन्हें दिसंबर में रोज ई-अटेंडेंस लगानी होगी। हर महीने औसत 30 करोड़ रुपए का भुगतान वेतन के रूप में होता है। वहीं इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने कहा कि ई-अटेंडेंस से शिक्षकों का स्कूल टाइम बढ़ा है। पहले विरोध, अब संगठन शांत, रियायत के आसार
वेतन रुकने का आदेश जारी होते ही शिक्षक व उनके संगठनों ने विरोध चालू कर दिया था। इन्होंने फूलबाग पर बैठक की, इसके बाद डीईओ दफ्तर पर प्रदर्शन किया तथा फिर कलेक्ट्रेट पहुंचे। दोनों अफसरों को ज्ञापन भी दिया। अब सारे संगठन शांत हैं। परेशान सिर्फ वे शिक्षक हैं जिनको वेतन नहीं मिला है। इनके घर गृहस्थी, लेन देन के सारे काम रुके हुए हैं। संभावना यह भी है कि इनको भी भृत्य व क्लर्कों की तरह चेतावनी देकर नवंबर का वेतन दिया जा सकता है।


