पशुओं के टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को पारदर्शी एवं प्रमाणिक बनाने के उद्देश्य से पशुपालन व डेरी विभाग द्वारा डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत अब टीकाकरण के बाद पशुपालक द्वारा ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बताना अनिवार्य होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सही पशुपालक के सही पशु को ही टीका लगाया गया है। प्रदेशभर में खुरपका-मुंहपका रोग (फुट एंड माउथ डिजीज, FMD) से बचाव के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इंदौर जिले में यह अभियान 1 जनवरी से प्रारंभ हुआ है, जो 15 फरवरी तक चलेगा। इस अवधि में जिले के करीब डेढ़ लाख पशुओं को FMD का टीका लगाया जाना है। अभियान को पूरी तरह डिजिटल बनाते हुए विभाग द्वारा हर पशुपालक का आधार नंबर लेकर पंजीकरण किया जा रहा है। 15 फरवरी से टीकाकरण के बाद ओटीपी दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। ओटीपी के माध्यम से टीकाकरण की वास्तविक पुष्टि होगी। टीकाकरण से संबंधित पूरा डाटा भारत पशुधन ऐप पर सुरक्षित रूप से दर्ज किया जा रहा है। अभियान के तहत गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों सहित जिले के लगभग डेढ़ लाख पशुओं को टीके लगाए जाने हैं। विभाग के अनुसार अब तक करीब 30 पशुओं का टीकाकरण पूर्ण किया जा चुका है। 84 AVFO की ड्यूटी, टैगिंग अनिवार्य डॉ. दिनकरराव पाटिल (उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं) ने बताया कि अभियान के लिए जिले में 84 सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों (AVFO) की ड्यूटी लगाई गई है। इनके साथ क्षेत्रीय मैत्री एवं गोसेवक कार्यकर्ता भी तैनात किए गए हैं। टीकाकरण के दौरान पशुओं के कान में टैग लगाना अनिवार्य है। जिन पशुओं में टैग नहीं है, उन्हें टैग कर रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है और पूरा डाटा डिजिटल रूप से अपलोड किया जा रहा है। डॉ. पाटिल ने बताया कि खुरपका-मुंहपका रोग इंसानों के लिए खतरनाक नहीं, लेकिन यह पशुधन के लिए गंभीर और आर्थिक रूप से अत्यंत नुकसानदायक बीमारी है। देशभर में इसके मामले सामने आते रहते हैं, इसी कारण हर वर्ष बड़े स्तर पर FMD टीकाकरण अभियान संचालित किया जाता है।


