भास्कर न्यूज| जांजगीर हिंदू नववर्ष के दूसरे महीने वैशाख की शुरुआत रविवार को हुई। भगवान विष्णु और देवी की उपासना के लिए यह महीना फलदायी माना जाता है। धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से इस महीने का विशेष महत्व है। मास की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से हुई। इस दिन हर्ष योग, बालव करण और चित्रा नक्षत्र का संयोग रहा। मास का समापन 12 मई को होगा। इस दौरान भगवान विष्णु, परशुराम और देवी की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है। स्कंद पुराण में वैशाख मास को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। श्लोक के अनुसार, “न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।” यानी महीनों में वैशाख, युगों में सत्ययुग, शास्त्रों में वेद और तीर्थों में गंगा श्रेष्ठ हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह महीना खास है। इस समय बीज बिखरते हैं और कोपलें फूटती हैं। सूर्य की तपन बढ़ने पर बेजुबान पशु-पक्षियों को दाना-पानी देने की परंपरा है। जलदान से मोक्ष की प्राप्ति मानी गई है। इस महीने में प्याऊ लगवाना, जल पात्र, कपड़े, आम, सत्तू, पंखा, छाया, अन्न और फल दान करना पुण्यदायी होता है। यह महीना दान और सेवा का श्रेष्ठ समय है। वैशाख के मुख्य त्योहार और व्रत 16 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी, 21 को भैरव अष्टमी, शीतला अष्टमी, 24 को वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती, 24 को प्रदोष व्रत (कृष्ण), 27 को वैशाख अमावस्या, 29 को परशुराम जयंती, 30 को अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती। मई: 1 को विनायक चतुर्थी, 2 को शंकराचार्य जयंती, 3 को गंगा सप्तमी, 6 को सीता नवमी, 8 को मोहिनी एकादशी, 9 को प्रदोष व्रत (शुक्ल), 11 को नरसिंह जयंती, छिन्नमस्ता जयंती, 12 को वैशाख पूर्णिमा व्रत, बुद्ध पूर्णिमा पड़ रही है।


