वैष्णो देवी-शिरडी से आगे खाटू श्याम जी, पूंछरी के लौठा में सालभर में 54 प्रतिशत बढ़े श्रद्धालु

श्रद्धालुओं की आस्था में सीकर जिला स्थित खाटू श्याम जी अब वैष्णो देवी और शिरडी के सांई बाबा से आगे निकल गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद डीग जिले का पूंछरी लौठा मंदिर में मथा टेकने वाले श्रद्धालु एक साल में ही 54 फीसदी बढ़कर डेढ़ करोड़ के करीब पहुंच गए। राजस्थान पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के दौरान प्रदेश के 10 प्रमुख मंदिरों में करीब 11 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, जो 2024 के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है। उधर, गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र के पूंछरी का लौठा मंदिर पुष्कर को पीछे छोड़ दूसरे स्थान पर पहुंच गया। यहां 2024 के मुकाबले श्रद्धालुओं की तादाद 54 फीसदी बढ़कर लगभग डेढ़ करोड़ हो गई। हालांकि, 2.54 करोड़ श्रद्धालुओं के साथ खाटू श्याम मंदिर अब भी शीर्ष पर है। लेकिन, बुनियादी सुविधाओं की कमी से सवाई माधेापुर जिले के शिवाड़ शिव मंदिर में श्रद्धालु घटने से यह 9वें से 10 वें स्थान खिसका गया। श्रद्धालुओं में कमी के बावजूद हनुमानगढ़ का गोगामेड़ी मंदिर 10 से 9वें स्थान पर पहुंच गया। सालासर हनुमान मंदिर, अजमेर दरगाह शरीफ, रामदेवरा और केला देवी मंदिर श्रद्धालुओं के लिहाज से अपने स्थान पर बने रहे, लेकिन सांवलिया सेठ मंदिर तीसरे से चौथे स्थान पर खिसक गया। इधर, फोर्टी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल का कहना है धार्मिक पर्यटन से परिवहन, हस्तशिल्प और होटल इंडस्ट्री को लाभ होगा। खाटूश्यामजी में व्यापारियों का टर्नओवर कई गुना बढ़ा है। सरकार को ‘धार्मिक सर्किट’ मजबूत करना चाहिए। लेकिन, मंदिरों के लिए ऑनलाइन दर्शन बुकिंग होनी चाहिए, ताकि भीड़ प्रबंधन हो सके। सरकार का फोकस अब पूंछरी लौठा मंदिर पर, ब्रज कन्वेंशन सेंटर बनेगा वित्त मंत्री दिया कुमारी ने इस साल बजट में डीग के पूंछरी लौठा में 100 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक ब्रज कन्वेंशन सेंटर का निर्माण की घोषणा की है। इसमें ठहरने के लिए कमरे, प्रदर्शनी क्षेत्र और पार्किंग होगी। यह पूंछरी लौठा मंदिर के पास विकसित होगा। क्षेत्र में सड़कों के चौड़ीकरण और ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग के सुदृढ़ीकरण का काम भी होगा। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन भी पूंछरी का लौठा के विकास के लिए सौ करोड़ रुपए देगा। बता दें, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूंछरी का लौठा मंदिर जाते रहते हैं। टेम्पल्स ऑफ इंडिया डॉट ओआरजी धर्माविकी के मुताबिक

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