2020 की पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अवनी लेखरा व कृष्णा नागर और ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सुंदर गुर्जर समेत कई पैरा खिलाड़ियों को 2021 में वन विभाग में एसीएफ (असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट) की नौकरी दी गई थी। मगर 4 साल बाद भी इन्हें परमानेंट नहीं किया गया है। वजह है-शर्तें पूरा न होना। ये शर्तें हैं- हर दिन पीटी, 2-3 किमी दौड़, पहाड़ों पर चढ़ना, हथियार चलाना व 7 दिन जंगल में रात बिताना। बड़ा सवाल ये है कि व्हीलचेयर पर बैठी अवनी और एक हाथ गंवाने वाले सुंदर गुर्जर जैसे पैरालिंपिक खिलाड़ी ये शर्तें कैसे पूरी करेंगे। इन्हें ग्रेड पे और इंटरनेशनल मेडल के लिए विशेष इंक्रीमेंट भी नहीं दिए गए हैं। जब नियुक्ति हुई थी तब यह शर्त थी कि 5 साल में इन्हें शैक्षणिक योग्यता और प्रोफेशनल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। सभी ने शैक्षणिक योग्यता तो पूरी कर ली है, लेकिन प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं कर पाए। अब ये खिलाड़ी ट्रेनिंग में छूट की मांग कर रहे हैं।इधर, वन विभाग के हॉफ अरिजित बनर्जी कहते हैं कि ‘यह मामला बहुत पेचीदा है। अगर खेल विभाग हमें लिखता है तो हम इस पर विचार करेंगे।’ ये मेरी नॉलेज में नहीं – खेल मंत्री खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि मेरी नॉलेज में अभी तक यह बात आई ही नहीं है कि वन विभाग ने पैरा खिलाड़ियों को परमानेंट नहीं किया है। देश की शान हैं हमारे ये पैरा खिलाड़ी। अगर वन विभाग खेल विभाग को इस बारे में लिखता है तो हम इन खिलाड़ियों को अन्य विभागों में नौकरी की कोशिश करेंगे। अब नौकरी पर तलवार, क्योंकि… नियुक्ति पत्र में यह भी लिखा था कि खिलाड़ियों ने पांच साल में शैक्षणिक व प्रोफेशनल ट्रेनिंग पूरी नहीं की तो उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। अगले साल उनके पांच साल हो जाएंगे और वन विभाग ट्रेनिंग की योग्यता पूरी नहीं होने के कारण इन्हें नौकरी से बेदखल कर देगा। जबकि ये खिलाड़ी मेडल भी जीत रहे हैं। पैरालिंपिक प्लेयर्स को 4 साल से परमानेंट नहीं कर रहा वन विभाग शटलर कृष्णा नागर कहते हैं, हम अर्जुन अवार्डी, खेलर| अवार्डी हैं। ट्रेनिंग में छूट मांग रहे हैं। 2 साल ट्रेनिंग के लिए जाएंगे तो करियर खत्म हो जाएगा। दो पैरालिंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाले सुंदर कहते हैं, अगर वन विभाग नहीं रखना चाहता तो हमें खेल विभाग में या किसी अन्य विभाग में नियुक्ति दे दी जाए। दो पैरालिंपिक गोल्ड जीतने वाली अवनी ने विभाग से ट्रेनिंग में छूट मांगी है। लिखा कि हम ज्यादातर समय कैंप में रहते हैं। या ट्रेनिंग में छूट मिले या ट्रेनिंग जयपुर में हो।


