शंकराचार्य मठ इंदौर में प्रवचन:किसी की मदद करके अहसान जताना अहंकार का ही रूप- डॉ. गिरीशानंदजी महाराज

एक अच्छे व्यक्ति को देखा जाए तो वह किसी का भी काम अहसान करने के लिए नहीं करता है, बल्कि दूसरे की मदद करने के लिए करता है। इसी तरह परमात्मा हम सबकी मदद करता है, पर इसके बदले में कुछ चाहता नहीं है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि या तो किसी से संबंध न बनाए और संबंध बन गए तो निभाए। यदि अपने लिए कोई कुछ कर देता है तो हमें उसको धन्यवाद तो कहना ही चाहिए। उसके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना चाहिए। हम यदि किसी का कुछ काम कर दें तो उसके बदले हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि वह हमारा अहसान माने। अहसान जताना भी एक प्रकार का अहंकार ही है। माता-पिता शिक्षक हमारे लिए कितना कुछ त्याग करते हैं, तब हम कुछ बन पाते हैं, पर बनने के बाद यदि हम उन्हें भूल जाएं, उनका अहसान न मानें तो हमसे बड़ा बेईमान कौन होगा? एरोड्रम क्षेत्र में दिलीप नगर नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने अपने नित्य प्रवचन में बुधवार को यह बात कही। मुसीबत में साथ देने वाला इनसान नहीं भगवान डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने कहा कि भगवान राम ने बाली को मारा, किष्किंधा का राज सुग्रीव को दे दिया। रावण को मारा तो विभीषण को लंका नरेश बना दिया, पर किसी को अहसान नहीं जताया। अच्छा इनसान वही होता है, जो किसी के लिए कुछ करके भूल जाए, पर जिसका काम करे उसे यह नहीं भूलना चाहिए। मुसीबत में साथ देने वाला इनसान नहीं भगवान होता है। भगवान राम ने सुग्रीव से मित्रता की थी। इस मित्रता को उन्होंने बाली को मारकर निभाया। संकटकाल में होती है अपनों की पहचान महाराजश्री ने एक दृष्टांत सुनाया- राम और श्याम दो मित्र थे। एक साथ पढ़े-लिखे, एक साथ राजा की सेना में भर्ती हो गए। युद्ध चल रहा था। राम और श्याम अलग-अलग टुकड़ी में थे। राम शत्रुओं से घिर गया, घायल हो गया तो उसने श्याम को आवाज लगाई। श्याम ने सेनापति से कहा- राम संकट में है मुझे बुला रहा है, मैं जाऊं। सेनापति ने कहा वहां पर संकट है, वह तो मर ही रहा है, तुम भी मर जाओगे। वैसे ही हमारे पास सेना कम है। श्याम रुक गया पर राम ने फिर उसे आवाज दी। इस बार उसने सेनापति से कहा- अब चाहे जो भी हो मैं मरूं चाहे जिंदा रहूं, मेरा मित्र मुझे बुला रहा है। सेनापति बोला- ठीक है जाओ। श्याम गया और राम को खींचकर एक छुपने की जगह पर ले गया। राम ने कहा मुझे पता था, तुम जरूर आओगे और उसने आखिरी सांस लेकर वीर गति प्राप्त कर ली। श्याम लौटकर आया। सेनापति ने कहा- मैंने तुमसे कहा था कि वह मर चुका है। श्याम ने कहा नहीं जब मैं गया तब वह जीवित था। अच्छे व्यक्ति की पहचान, अच्छे मित्र की पहचान, अच्छे संबंधियों की पहचान संकटकाल में ही होती है।

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