शनि अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी

आज से आठ दिवसीय चैत्र नवरात्र प्रारंभ, हिन्दू नववर्ष की होगी शुरूआत
शनि अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी
अमरकंटक।
पवित्र नगरी अमरकंटक में आज चैत्र मास की अमावस्या पर दूर-दूर से आए भक्त श्रद्धालुओं तीर्थ यात्रियों ने पुण्य सलिला मां नर्मदा जी के पावन तट रामघाट पुष्कर बांध  एवं आरंडी संगम  तट में आस्था की डुबकी लगाई स्नान किया तथा दर्शन कर पूजा दर्शन किया तथा साथ ही भक्त श्रद्धालुओं ने शनि अमावस्या के पावन अवसर पर पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाया एवं भगवान शनि देव महाराज की प्रतिमा पर जल चढ़ाया पुष्प चढ़ाए तेल चढ़ाया तथा काला तिल काला काला काला उड़द काला वस्त्र एवं सिक्का आदि चढ़ाकर पूरे मनोयोग से धार्मिक भावना के साथ पूजन आरती अभिषेक किया तथा अपनी हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की तथा मन्नत मनौती मांगी । सुबह से ही भक्त श्रद्धालु तीर्थ यात्रियों के द्वारा नर्मदा नदी में स्नान दर्शन पूजन अर्चन का क्रम शुरू हो गया था जो शायं कल तक  निरंतर चलता रहा।
चैत्र नवरात्रि 8 दिनों की, जानें कलश स्थापना हिन्दू नव वर्ष होगा चालू
अनूपपुर इस बार नवरात्रि का त्योहार 30 मार्च से शुरू होगा और छह अप्रैल तक मनाया जाएगा। नवरात्रि के दिनों में पांच विशेष योग बनने और माता की सवारी हाथी होने के चलते इस बार की नवरात्रि इस बार नवरात्रि का त्योहार 30 मार्च से शुरू होगा और छह अप्रैल तक मनाया जाएगा। नवरात्रि के दिनों में पांच विशेष योग बनने और माता की सवारी हाथी होने के चलते इस बार की नवरात्रि सुख समृद्धि से पूर्ण होगी। इस बार नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्ध, ऐंद्र, बुद्ध आदित्य, शुक्र आदित्य, लक्ष्मी नारायण योग बनने से नवरात्रि विशेष फलदायक होगी। नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण उत्सव है, जिसे शक्ति की पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। यह पर्व साल में चार बार मनाया जाता है, जिनमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व है, जो हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। स्थापना का शुभ मुहूर्त 2025- घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 13 मिनट से प्रारंभ होगा और सुबह 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना का अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना की कुल अवधि 50 मिनट की रहेगी।
कलश स्थापना की विधि
त्रिपाठी जी बताते है की नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते समय सबसे पहले सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें। एक मिट्टी के बड़े पात्र में मिट्टी डाल दें और इसमें ज्वारे के बीज डालें। उसके बाद सारी मिट्टी और बीज डालकर पात्र में थोड़ा-सा पानी छिड़क दें। अब गंगाजल भरे कलश और ज्वारे के पात्र पर मौली बांध दें। जल में सुपारी,दूर्वा घास, अक्षत और सिक्का भी डाल दें। अब कलश के किनारों पर आम के 5 पत्तों को रखें और कलश का ढक्कन से ढक दें। एक नारियल लें और उसपर लाल कपड़ा या चुनरी लपेट दें। नारियल पर मौली बांध दें। इसके बाद कलश और ज्वारे स्थापित करने के लिए सबसे पहले जमीन को अच्छे से साफ कर लें। इसके बाद ज्वारे वाला पात्र रखें। उसके ऊपर कलश स्थापित करें और फिर कलश के ढक्कन पर नारियल रख दें। फिर सभी देवी-देवताओं का आह्मान करने के साथ नवरात्रि की विधिवत पूजा आरंभ करें। कलश स्थापित करने के बाद नौ दिनों तक मंदिर में रखे रहना चाहिए। सुबह-शाम आवश्यकतानुसार पानी डालते रहें।

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