कोटा में अब सफाई को लेकर निगम ऑनलाइन ट्रेकिंग करेगा। इसके लिए तैयार किया जा रहा इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम तैयार है। कोटा उत्तर क्षेत्र के लिए आरएफआईडी के माध्यम से टिपर्स की मूवमेंट की ट्रेकिंग का काम पूरा हो चुका है तथा उसका ट्रायल रन किया जा रहा है। वहीं कोटा दक्षिण क्षेत्र में भी इसी सप्ताह यह काम पूरा हो जाएगा। नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बतया कि शहर में घर-घर कचरा संग्रहण का काम कर रहे टीपर्स की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए नगर निगम भवन में इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की स्थापना की गई है। मॉनिटरिंग के लिए विभिन्न क्षेत्रों में घरों पर आरएफआईडी लगाई जा रही है। कोटा उत्तर क्षेत्र में 18000 आरएफआईडी लगाने का काम पूरा हो चुका है और उनके माध्यम से टीपर्स की मॉनिटरिंग का ट्रायल रन भी पूरा हो चुका है। कोटा दक्षिण क्षेत्र में भी 20000 मकानों पर आरएफआईडी लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि निर्देश दिए गए हैं कि कोटा दक्षिण क्षेत्र में भी आरएफआईडी टैग के माध्यम से टिपर्स की मॉनिटरिंग का काम इसी सप्ताह शुरू कर दिया जाए। इसके साथ ही लोगों के लिए बन रहे एप को भी सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करने का काम जल्द पूरा किया जाएगा। एक माह में लाइव करें ऐप
आयुक्त मेहरा ने बताया कि अधिकारियों व ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं कि लोगों के लिए जो ऐप बनाई जा रही है वह ऐप एक महीने में लाइव की जाए। ऐप लाइव होने पर आमजन भी अपने क्षेत्र की ऑनलाइन मूवमेंट ट्रेक कर सकेगे। इसके अलावा वे टीपर नहीं आने, क्षेत्र में कचरा पड़ा होने सहित सफाई से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतें भी एप के माध्यम से ही दर्ज करवा सकेंगे। जिससे संबधित अधिकारी तक शिकायत पहुंचेगी और शिकायत का समाधान होने के बाद उस पर अपडेट भी किया जाएगा। 21 लोगों की टीम रखती है नजर
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल रूम में एक सुपरवाइजर और 20 एक्जीक्यूटिव्स की टीम शहर में विभिन्न स्थानों पर घर-घर कचरा संग्रहण काम में लगे टीपर्स की मॉनिटरिंग करती है। आरएफआईडी टैग के कारण टीपर्स की मूवमेंट कंट्रोल रूम में लगे एक विशाल स्क्रीन पर नजर आती है। अगर कोई टीपर अपने क्षेत्र में नहीं पहुंचा है या एक ही जगह पर खड़ा दिखाई दे रहा है तो कंट्रोल रूम से ही टीपर चालक को फोन कर कारण पूछा जाता है।


