भले ही हर बिल्डिंग से नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स और कमर्शियल टैक्स लेने के दावे कर रहा हो लेकिन हकीकत में ये दावे हवाई साबित हो रहे हैं। शहर में 60 फीसदी शराब के ठेके से ही निगम को कमर्शियल टैक्स के रूप में रेवेन्यू प्राप्त हो रहा है, जबकि 40 फीसदी से नहीं आ रहा है। निगम क्षेत्र में कितने ठेके नए खुले हैं, इसका रिकॉर्ड निगम के पास नहीं है। अब टैक्स मुख्यालय ने नगर निगम के चारों जोनों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। नगर निगम के रिकॉर्ड में मकान और कमर्शियल बिल्डिंग की संख्या करीब पौने 5 लाख दर्ज है जबकि पिछले कुछ सालों में नगर निगम क्षेत्र में रिहायशी कॉलोनियां बढ़ने से मकानों और बिल्डिंगों की संख्या बढ़कर साढ़े पांच लाख के करीब पहुंच चुकी है। इस साल नगर निगम का टैक्स के रूप में राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य 140 करोड़ है। 130 करोड़ राजस्व नगर निगम प्राप्त कर चुका है। एक महीना 4 दिन बचे, कैसे होगी रिकवरी नगर निगम की टैक्स ब्रांच ने 2024 से 2025 वित्तीय वर्ष में टारगेट 140 करोड़ तय किया था। 10 महीने में नगर निगम टारगेट के करीब पहुंच चुका है। हालांकि अभी 9 करोड़ की रिकवरी शेष होनी है। निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने के लिए प्रचार भी किया जा रहा है लेकिन कई बकायेदारों ने टैक्स का भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के लिए मार्च महीना शेष है और फरवरी के चार दिन शेष हैं। अब टारगेट तक पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन विगत 10 महीनों में निगम अफसरों ने तेजी नहीं दिखाई। 500 से ज्यादा ठेके, बचे हुए ठेकों से डेढ़ करोड़ रेवेन्यू आ सकता हाल ही र निगम अधिकारियों को जानकारी मिली कि जोन ए, जोन बी, जोन सी और जोन डी में शराब के ठेकों की संख्या अधिक है जबकि उन्हें राजस्व कम प्राप्त हो रहा है। ऐसे में नगर निगम के टैक्स ब्रांच के मुख्यालय ने जोन ए, जोन बी, जोन सी और जोन डी के जोनल कमिश्नरों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। इसमें उनसे कहा गया है कि सर्वे कर पता करें कि उनके जोनों में कितने शराब के ठेकों से टैक्स नगर निगम को मिल रहा है और जिनसे नहीं मिल रहा है उनके खिलाफ गाइडलाइंस के तहत कार्रवाई कर राजस्व हासिल किया जाए। सूत्रों ने बताया कि चार जोनों में 500 से अधिक शराब के ठेके हैं। प्रत्येक ठेके से निगम को सालाना 50 हजार रुपये टैक्स आता है। निगम का मानना है कि अगर सारे शराब के ठेकों से राजस्व प्राप्त होगा तो करीब डेढ़ करोड़ और रेवेन्यू आ सकता है। एडिशनल कमिश्नर परमदीप सिंह का कहना है कि नगर निगम की विभिन्न ब्रांचों को टारगेट हासिल करने के निर्देश दिए हैं। बकाएदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। नए प्रॉपर्टीज की भी पहचान की गई है जिन्हें नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जा रही है। निगम का 20 को नोटिस, किरायानामा मांगा नगर निगम क्षेत्र में कमर्शियल बिल्डिंग लगातार बढ़ रही है। इनमें से कुछ ऐसी बिल्डिंग हैं जो नगर निगम को रेवेन्यू प्रदान नहीं कर रही हैं। निगम ने हाल ही में सर्वे कराया था जिसमें पाया गया कि साउथ सिटी रोड में नगर निगम की हद में वाहनों के शोरूम खुले हैं जिनके द्वारा निगम को कमर्शियल टैक्स नहीं दिया जा रहा है। निगम ने इनकी रिपोर्ट तैयार की है और 20 शोरूम संचालकों और दुकानदारों को नोटिस जारी किए हैं। निगम ने शोरूम संचालकों से किरायानामा लेकर आने को कहा है ताकि ये पता चल सके कि वे कब से वहां कारोबार कर रहे हैं।


