गुरमीत लूथरा | अमृतसर रणजीत एवेन्यू के अमृत आनंद पार्क में 14 अगस्त 2021 को स्थापित जलियांवाला बाग शहीदी स्मारक अपेक्षा की भेंट चढ़ गया है। समाजिक संगठनों ही नहीं बल्कि शहीदों के परिवारों ने भी इससे दूरी बनाकर रखी है। जलियांवाला बाग के शहीदों की याद में 3.53 करोड़ से 4490 वर्ग मीटर में निर्मित यादगार जिला प्रशासन व सरकारों की उपेक्षा के चलते धूल फांक रही है। पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित किए गए उक्त यादगारी स्मारक के निर्माण के साढ़े 4 साल बीतने के बाद भी उपेक्षा का शिकार है। उक्त यादगार पर लगा संगमरमर जगह-जगह से टूट रहा है। स्मारक के साथ लगते क्षेत्र में गंदगी के ढेर लगे हैं। आलम यह है कि शहीदों के नामों की लगी पट्टशिला भी उखड़ कर टूट गई है। बता दें कि जलियांवाला बाग कांड में शहीदों के गांवों की मिट्टी की ट्रालियां लाकर इस शताब्दी यादगार का निर्माण करवाया गया था। इसकी कहानी बयां करता लाइंड एंड साउंड प्रोग्राम शुरू किए जाने का पूर्व सरकार ने दावा किया था लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। रात को जगमगाहट के लिए स्थापित की गई लाइट्स भी बंद पड़ी हैं। टूटी लाइट्स और उखड़े खंभे दुर्दशा का कहानी बयां कर रहे हैं। जलियांवाला बाग शहीद परिवार समिति के प्रमुख नैनीश बहल ने जिला प्रशासन से इस स्थल को ध्वस्त कर इसे स्थायी तौर पर बंद करने की मांग की है। कांग्रेस सरकार के दौरान स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने शहरवासियों को मूर्ख बनाने व लूट खसूट करने की नीयत से ही इसे स्थापित किया था। वास्तव स्मारक होने के बावजूद यहां डुप्लीकेट स्मारक स्थापित कर शहीदों की शहादत का मजाक उड़ाया गया है।


