शाहजहांपुर में शांत बैठ गई पुलिस:3 दिन बाद भी एमडी पर नहीं हुई कार्रवाई, दहशत में पीड़िता

शाहजहांपुर में नेशनल और स्टेट हाइवे बनाने वाली राज कार्पोरेशन के एमडी मनोज यादव पर गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। 28 दिसंबर को एफआईआर दर्ज होने के तीन दिन बाद भी पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण नहीं कराया और न ही उसके बयान दर्ज किए। रसूख के चलते सुस्त कार्यशैली पुलिस की धीमी कार्रवाई से एमडी के प्रभाव और रसूख का अंदाजा लगाया जा सकता है। एफआईआर से पहले पीड़िता द्वारा दिए गए सबूतों की जांच की गई थी। पुलिस ने आरोप सही पाए जाने के बाद एफआईआर दर्ज की, लेकिन अब आरोपी को वक्त देने की रणनीति अपनाई जा रही है। कंपनी के एमडी पर आरोप बाराबंकी की रहने वाली पीड़िता, राज कार्पोरेशन लिमिटेड में कर्मचारी है। उसने एमडी मनोज यादव पर अश्लील वीडियो और मैसेज भेजने, होटल बुलाने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। दफ्तर में छेड़छाड़ और धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं। नहीं हो रही आरोपी की तलाश राज कार्पोरेशन का प्लांट थाने से कुछ दूरी पर स्थित है, लेकिन पुलिस ने वहां जांच करने या एमडी के मैनपुरी स्थित आवास की पड़ताल करने की जहमत तक नहीं उठाई। यह लापरवाही आरोपी को राहत देने की ओर इशारा करती है। दहशत में पीड़िता एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़िता इतनी दहशत में है कि वह पुलिस के पास जाने से भी घबरा रही है। पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश तक नहीं की कि पीड़िता मेडिकल परीक्षण के लिए क्यों नहीं आ रही है। सबूतों के बावजूद कार्रवाई नहीं पीड़िता ने एसपी को दिए प्रार्थना पत्र में अश्लील वीडियो और अन्य साक्ष्य पेश किए थे। इसके बाद ही एफआईआर दर्ज की गई। बावजूद इसके, पुलिस की निष्क्रियता ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एसपी ने दिया बयान एसपी राजेश एस ने कहा कि पीड़िता से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रकरण की गहनता से विवेचना की जा रही है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और बयान जल्द ही दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल पुलिस की सुस्ती और आरोपी पर कार्रवाई न होने से मामला गंभीर बन गया है। इससे यह साफ होता है कि रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस का ढुलमुल रवैया बना हुआ है।

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