शाहपुरा के श्री खान्या के बालाजी महाराज प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को भव्य समापन हुआ। कथा का वाचन परमहंसाचार्य स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज ने किया। कथा के अंतिम दिन स्वामी दयानंद सरस्वती ने भगवान श्री कृष्ण और उनके मित्र सुदामा की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि सुदामा, जो विद्वान और ब्राह्मण थे, गरीबी के कारण कठिनाइयों से घिरे हुए थे। उनकी पत्नी सुशीला के कहने पर जब वे श्री कृष्ण से मिलने द्वारिका गए, तो श्री कृष्ण ने उनकी दरिद्रता दूर करने का उपाय बताया। इस उपाय से सुदामा का जीवन बदल गया। कथा वाचक ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों की हर समस्या का समाधान करते हैं। जब भी उनके भक्त कष्ट में होते हैं, वे स्वयं उनकी सहायता के लिए आते हैं। उन्होंने भागवत कथा को आध्यात्मिक आनंद का स्रोत बताते हुए कहा कि भागवत कथा का नशा ऐसा है जो कभी नहीं उतरता। हमें इसे सुनकर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए। सात दिवसीय कथा में क्षेत्र के सैकड़ों भक्त शामिल हुए। प्रमुख रूप से उपस्थित व्यक्तियों में भंवर सेन, शंभू सेन, नरेंद्र सेन, समुंद्र सेन, राजेंद्र खटीक, राधेश्याम धोबी, अनुराग शर्मा, तेजपाल उपाध्याय, घिसी सेन, पिंकी सेन, साक्षी सेन, गुलाबी खटीक, लाडू गुर्जर, संतोक खटीक और मंजू खटीक शामिल रहे। कथा समापन पर श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और इस आयोजन के सफल संचालन के लिए मंदिर समिति और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मकता और भक्ति का प्रसार करते हैं।


