पार्षदों को क्या मुश्किलें आ रही इस बारे बातचीत कर समाधान निकालेंगे। पेंडेंसी का जल्द निपटारा कराने को कहा जाएगा। निगम कमिश्नर से भी बात करेंगे कि अफसरों की मीटिंग बुलाएं ताकि कोई स्थायी हल निकाला जा सके। -जतिंदर सिंह भाटिया, मेयर वार्ड न. 53 के पार्षद कोमल शाह की पेंडेंसी 78, वार्ड न. 16 संदीप की 48, वार्ड न. 72 अवतार सिंह की 43, वार्ड न. 43 के इंदरजीत सिंह 41, वार्ड न. 65 के नीरज चौधरी 39, वार्ड न. 69 गुरप्रीत कौर 37, वार्ड न. 76 सुखबीर सिंह 36, वार्ड न. 44 जसविंदर सिंह 36, वार्ड न. 77 सुनीता 32, वार्ड न. 40 गुरविंदर सिंह 30, वार्ड न. 19 नवजीत कौर 26, वार्ड 18 नवदीप सिंह 24, वार्ड 52 विकास 22, वार्ड 57 मंजू 22, वार्ड 66 के विराट देवगन 21, वार्ड 64 के नीतू 19, वार्ड 75 कश्मीर सिंह 18, वार्ड 68 विकास 17, वार्ड 81 निशा ढिल्लों 17, वार्ड 17 अनीता 17, वार्ड 1 कुलजीत कौर 17, वार्ड 36 अशोक 16, वार्ड 22 सुजिंदर बिडलान 16, वार्ड 4 मनदीप आहूजा 16, वार्ड 62 समीर दत्ता 15, वार्ड 78 अनीता 14, वार्ड 49 रितु कुंद्रा 12, वार्ड 71 सुरजीत कौर 11, वार्ड 20 गुरिंदर 10, वार्ड 11 प्रियंका 9, वार्ड 21 कुलविंदर कौर 9, वार्ड 35 अमरजीत कौर 9, वार्ड 54 अमित 8, वार्ड 82 संदीप सिंह 5, वार्ड 73 कुलदीप सिंह 5, वार्ड 67 अनीता 5, वार्ड 26 जतिंदर 5, वार्ड 61 रजनी 4, वार्ड 25 मोनिका शर्मा 4, वार्ड 84 रशपाल सिंह 4, वार्ड 51 सरिता 4, वार्ड 29 श्वेता छाबड़ा 4, वार्ड 23 कुलविंदर कौर 3, वार्ड 56 वरिंदर दत्ता 3, वार्ड 41 सुखविंदर कौर 3, वार्ड 42 गगनदीप सिंह 3, वार्ड 32 जगमीत सिंह 3, वार्ड 80 रमन कुमार 3, वार्ड 9 शोभित कौर 3, वार्ड 28 सौरभ मदान 3, वार्ड 79 शिवाली 2, वार्ड 47 किरनजीत कौर 2, वार्ड 59 गुरमीत कौर 2, वार्ड 39 मनप्रीत कौर 2, वार्ड 50 रितु 2, वार्ड 15 रामा 2, वार्ड 38 भगवंत सिंह 2, वार्ड 46 नवप्रीत सिंह 2, वार्ड 7 काजल 2, वार्ड 2 अमरजीत सिंह 2, वार्ड 63 ऊषा रानी 1, वार्ड 3 नवदीप कौर 1, वार्ड 58 जरनैल 1, वार्ड 27 प्रीत कौर 1, वार्ड 8 बलविंदर गिल 1, वार्ड 10श्रुति विज 1, वार्ड 37 गुरजीत कौर 1, वार्ड 30 अवतार सिंह 1, वार्ड 45 सुखबीर कौर 1, वार्ड 12 नरेंद्र सिंह 1 पेंडेसी हैं। एडीसी जनरल दफ्तर में ही 50 फाइलों की पेंडेंसी है। जिसमें एडीसी रोहित की लॉ-गिन आईडी में 45 पेंडेंसी है। जबकि उनके क्लर्क हरजिंदर ने 5 फाइलें अटका रखी है। वहीं, निगम के ज्वाइंट कमिश्नर जय इंद्र के दफ्तर में 101 फाइलें पेंडिंग हैं। जिसमें उनके अधीन कार्यरत डॉ. प्रीतवीन कौर मेडिकल ऑफिसर के पास 37, तो सतिंदर कुमार शर्मा, डीलिंग क्लर्क के पास 35 और डॉ. मनीष कुमार शर्मा, एग्जीक्यूटिव अफसर के पास 23 फाइलें लंबित हैं। इसी तरह अमित कुमार डीलिंग क्लर्क के पास 3 तो राकेश कुमार डीलिंग क्लर्क के पास 2 और चमकौर सिंह, सब-रजिस्ट्रार, ईस्ट जोन के पास 1 फाइल की पेंडेंसी है। एसएसपी रुरल के दायरे में आते कामों को लेकर 114 पेंडेंसी है। जिसमें अकेले सांझ एडमिन पंजाब से 113 तो जंडियाला में एक पेंडेंसी है। वहीं डिस्ट्रिक रेवेन्यू अफसर दफ्तर में 57 फाइलें लंबित हैं। जिसमें सीनियर क्लैरिकल असिटेंड एससीए के पास सबसे अधिक 45 तो हेड रजिस्ट्री क्लर्क के पास 8, हेड रजिस्ट्री क्लर्क अमृतसर-1 के पास 3 और सुपरिटेंड डीसी ऑफिस के पास 1 पेंडेंसी है। शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर पंजाब सरकार ने नागरिकों को घर बैठे जाति, आय व अन्य जरूरी प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से एक साल पहले जिस ऑनलाइन अप्रूवल प्रक्रिया की शुरुआत की थी, वह अब सिस्टम की सुस्ती और फाइलें लटकाने के पुराने खेल की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। अमृतसर के 70 वार्डों में पार्षदों की आईडी में टाइमलाइन से अधिक समय यानि 15 दिन से ज्यादा से 879 फाइलों की पेंडेंसी है जिससे सिटीजन का घर बैठे सर्टिफिकेट अप्रूव कराने का सपना धरा रह गया है। स्थिति यह है कि लोग डिजिटल सुविधा के बावजूद आज भी डीसी ऑफिस, तहसील और निगम दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 15 वार्डों में हालत सबसे चिंताजनक है जहां 21 से लेकर 78 फाइलें तक लटकीं हुई हैं। जिसमें अलग-अलग कामों को लेकर 535 पेंडेंसी है। जबकि 13 वार्डों में 11 से 19 तक फाइलें लटकी है, जिसमें कुल पेंडेंसी 198 है। वहीं, 1 से 10 पेंडेंसी वाले 42 वार्ड हैं जिसमें 146 पेंडेंसी बनी हुई है। सबसे अधिक वार्ड 53 में 78 फाइलें पेंडिंग हैं जबकि सबसे कम 1-1 पेंडेंसी वाले 10 वार्ड हैं। वार्ड 66 के पार्षद विराट देवगन ने बताया कि पटवारी दूसरे वार्डों के सिटीजन की वेरिफिकेशन डाल देते हैं। जब भी टाइम मिलता है तो संबंधित पटवारी को वापस भेज देते हैं। यह हाल सभी वार्डों के पार्षदों का है। पार्षदों के पास पेंडेंसी बढ़ रही तो प्रशासन-निगम के उच्च अफसरों को चाहिए कि सिस्टम में जहां भी दिक्कत आ रही उसका हल निकालें। पार्षदों के साथ इस मुद्दे को लेकर एक साल में कितनी बार मीटिंग की गई यह अफसर बताएं। अफसरों को पेंडेंसी बढ़ने के कारण जानने चाहिएं।


