शिक्षक की लापरवाही:परीक्षा देने से वंचित रह गए 20 छात्र, दस्तावेजों के साथ फीस भी ली, लेकिन फार्म बोर्ड में नहीं भेजे

शिक्षक की लापरवाही के कारण कस्बे के 20 स्वयंपाठी विद्यार्थी इस बार 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। इनका शुक्रवार को पहला पेपर होना था। परीक्षा से वंचित होने के कारण छात्रों व अभिभावकों में रोष व्याप्त है। उन्होंने पुलिस थाने में रिपोर्ट देकर संबंधित शिक्षक व स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा प्रभारी (शिक्षक) मुकेश की भूल के कारण 20 स्वयंपाठी विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा देने से वंचित रह गए। विद्यार्थियों ने बताया कि बोर्ड परीक्षा के लिए अगस्त में फॉर्म भरवाए गए थे। छात्रों ने 10वीं की अंकतालिका के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करवा दिए। प्रत्येक विद्यार्थी ने परीक्षा शुल्क के 800 रुपए भी जमा करवा दिए थे। परीक्षा से पहले जब वे प्रवेश पत्र लेने विद्यालय पहुंचे तो परीक्षा प्रभारी टाल-मटोल करने लगे। लगातार तीन दिन से चक्कर काटने के बाद गुरुवार को वापस स्कूल पहुंचे तो परीक्षा प्रभारी ने छात्रों को फॉर्म नहीं भरे जाने की सूचना दी। मामले को लेकर छह छात्रों ने गुढ़ा थाने में संबंधित शिक्षक के खिलाफ रिपोर्ट दी है। घटना के बाद अभिभावकों में आक्रोश है। उन्होंने विद्यालय प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की है। विद्यालय प्रबंधन ने भी पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी। प्रधानाचार्य रणजीत सिंह का कहना है कि वे छुट्टी पर चल रहे हैं। मामले की जानकारी नहीं है। इस प्रकार का मामला है तो गंभीर विषय है। जांच करवाई जाएगी। शिक्षक ने कहा, भूलवश फॉर्म नहीं भेजे गए विद्यार्थी जब प्रवेश पत्र लेने स्कूल पहुंचे तो परीक्षा प्रभारी मुकेश ने बताया कि छात्रों के फॉर्म भूलवश भेजे ही नहीं गए, जबकि उनकी फीस पूरी जमा है। साथ ही आश्वासन दिया कि सितंबर में पुन: फॉर्म भरे जाएंगे। उस समय उनके फॉर्म भरवाकर सभी छात्रों को परीक्षा दिला दी जाएगी, जिसका परिणाम दिसंबर महीने में जारी होगा। सीबीईओ बोले- मामले की जानकारी ले रहे हैं उदयपुरवाटी के सीबीईओ नरेशकुमार गुप्ता का कहना है कि गुढ़ागौड़जी की स्कूल में स्वयंपाठी विद्यार्थियों के फॉर्म नहीं भरने का मामला सामने आया है। जानकारी ले रहे हैं कि विद्यार्थियों के फॉर्म जमा क्यों नहीं हुए। माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर ही मामले की जांच की जाएगी। यदि जांच में शिक्षक द्वारा लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

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