कहते हैं कि इरादे मजबूत हों, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय (राप्रावि) सीमलघाटी भागेला के शिक्षक हेमंत परमार ने।
उनके प्रयासों से आज यह स्कूल शिक्षा की एक अनूठी मिसाल बन गया है। शिक्षक के जुनून ने सरकारी स्कूल की सूरत बदल दी है। जिसके चलते निजी स्कूल छोड़ अब बच्चे यहां आ रहे है। अपनी पहली सैलरी स्कूल के विकास में लगा दी
राप्रावि सिमलघाटी भागेला के शिक्षक हेमंत परमार ने अपनी पहली सैलरी से 35 हजार रुपए खर्च कर स्कूल के रख-रखाव और कायाकल्प की शुरुआत की। उन्होंने केरल मॉडल की तर्ज पर स्कूल की दीवारों को ट्रेन के डिब्बों जैसा रूप दिया। इस आकर्षक पेंटिंग ने बच्चों के मन में स्कूल आने के प्रति भारी उत्साह जगा दिया है। शिक्षक के प्रयास रंग लाए, नामांकन बढ़ा
शिक्षक हेमंत के प्रयास से स्कूल के नामांकन में तेजी आई है। साल 2016 में जहां स्कूल में मात्र 3-4 विद्यार्थी थे, वहीं आज नामांकन बढ़कर 50 तक पहुंच गया है। पिछले 3 साल में 14 बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर इस सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। यहां बच्चों को उनकी मातृभाषा वागड़ी के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी कविताओं के माध्यम से पढ़ाया जाता है। आज यहां पहली कक्षा का छात्र अंग्रेजी बोलता है और 5वीं का छात्र 32 तक पहाड़े सुनाता है। जर्जर भवन से आधुनिक स्कूल
शिक्षक हेमंत ने बताया कि पहले बारिश में छत टपकती थी और कमरों में पानी भर जाता था। लेकिन अब स्कूल में बिजली, पानी और आधुनिक भौतिक संसाधन उपलब्ध हैं। हेमंत परमार बताते हैं कि उन्होंने अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क कर उनका विश्वास जीता। अब ग्रामीण और भामाशाह भी आगे आ रहे
स्कूल की बदलती तस्वीर देख अब ग्रामीण और भामाशाह भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। शिक्षक हेमंत परमार बताते है कि यदि हम अपने काम के प्रति समर्पित हों और समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। हेमंत ने अपनी पहली सैलरी स्कूल के विकास में लगा दी, जिससे बच्चों का भविष्य संवर रहा है।


