पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तृणमूल सरकार ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। घोटाले में 25,753 शिक्षक फंसे हैं। स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) ने इनमें से 19 हजार योग्य शिक्षकों की लिस्ट राज्य के एजुकेशन डिपार्टमेंट को भेज दी है। करीब 7 हजार शिक्षक, जो इस घोटाले के उजागर होने तक नौकरी कर रहे थे सिर्फ वे अयोग्य घोषित होंगे। योग्य शिक्षकों के नाम राज्य सरकार जल्द ही सार्वजनिक कर सकती है। हालांकि, शिक्षकों ने 21 अप्रैल तक सूची जारी करने की मांग की है। इसे लेकर वे 16 अप्रैल से दिल्ली में भी धरना शुरू करने जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल को घोटाले से जुड़े कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने 2016 की शिक्षक और स्टाफ भर्ती को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां थीं। CBI ने 19 हजार योग्य उम्मीदवार छांटे
SSC के एक अधिकारी ने भास्कर को बताया कि CBI ने 2016 की भर्ती परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी न्यासा कम्युनिकेशन के एक पूर्व कर्मचारी के गाजियाबाद स्थित आवास से एक हार्ड डिस्क बरामद की थी। डिस्क में OMR शीट की स्कैन कॉपियां थीं। SSC के ऑफिस से जब्त सर्वर में भी कुछ डेटा था। उस परीक्षा में करीब 22 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। अभी जो 19 हजार नाम तय हुए हैं, वे CBI ने OMR शीट की मिरर इमेज देखकर तैयार किए गए हैं। वहीं, आंदोलनकारी शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार सभी OMR शीट्स की मिरर इमेज जारी करे। इससे योग्य और अयोग्य का सच खुद ब खुद सामने आ जाएगा। इस पर शिक्षा विभाग का कहना है कि शीट्स की मिरर इमेज जारी करना संभव नहीं है, क्योंकि SSC के पास कोई OMR शीट नहीं है। 2 पॉइंट में पूरा मामला समझें… ———————————————————– मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ममता बोलीं- काबिल टीचर्स के लिए कोर्ट का फैसला अन्यायपूर्ण, मत समझिए हमने इसे स्वीकार किया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों और गैर शिक्षकों से 7 अप्रैल को मुलाकात की थी। इस दौरान ममता ने कहा था कि फैसला उन कैंडिडेट्स के साथ अन्याय है, जो काबिल शिक्षक थे। आप लोग यह मत समझिए कि हमने फैसले को स्वीकार कर लिया है। पूरी खबर पढ़ें…


