शहरवासियों को नियम-कायदे गिनाने वाले सरकारी अफसर और विभाग खुद काम करते समय इन्हें ताक में रखने से नहीं चूकते। बहाव की जमीन और अवैध निर्माण बताते हुए एक व्यापारी के शोरूम को ज़मींदोज करवा दिया। अब अफसरों ने 74 लाख रुपए की सरकारी बिल्डिंग बनवाने के लिए पूरा तालाब ही मिट्टी से पटवा दिया। जबकि, रेवेन्यू रिकॉर्ड में यह जमीन यूआईटी के नाम दर्ज है और यूआईटी ने शिक्षा विभाग को इसे आवंटित ही नहीं किया गया। सेवर रोड पर शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा अभियान के तहत 74 लाख रुपए की लागत से बिल्डिंग बनवा रहा है। यह निर्माण गोलपुरा के खसरा संख्या संख्या 111-110 पर हो रहा है। यूआईटी(बीडीए) और तहसील के रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन विभाग की है ही नहीं। ना ही विभाग के पास इसके आवंटन या मालिकाना हक का कोई दस्तावेज है। खसरा संख्या 110 पर पोखर दर्ज है। मौके पर भी निर्माण से पहले काफी पानी भरा हुआ था। ऐसे में निर्माण करने से पहले मिट्टी से पूरे पोखर में भर्त करा दी गई, जबकि कानूनन ऐसा किया ही नहीं जा सकता। बिल्डिंग के ठीक सामने 200 फुट की रोड प्रस्तावित है। जिसके लिए सड़क के दायरे में आ रहे मकानों को तोड़ने के लिए एक ओर प्रशासन नोटिस दे चुका है। दूसरी ओर खुद सरकारी विभाग ने ही सड़क के लिए आवश्यक जमीन भी छोड़ना तक जरूरी नहीं समझा। जमीन का रिकॉर्ड देखे बिना ही सेवर रोड पर बना दिया पूरा भवन, 2 साल पहले सैटेलाइट इमेज में दिखाई दे रहा तालाब वॉटर बॉडीज में निर्माण और कन्वर्जन पर रोक हाईकोर्ट ने अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार वाली पीआईएल पर 2003 और 2004 में निर्देश और आदेश जारी किए थे। जिनके अनुसार किसी भी वॉटर बॉडी (जल स्त्रोत) और उसके कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह का निर्माण नहीं हो सकता। ऐसी जमीनों का कन्वर्जन भी नहीं किया जा सकता। “यूआईटी से इसके लिए कोई भूखंड आवंटित नहीं हो रखा है। किसी भी भवन निर्माण के लिए अनुमति लेना आवश्यक है।” – ऋषभ मंडल, सचिव, यूआईटी(बीडीए) “निर्माण से पहले जमीन का मालिकाना हक और नियमानुसार काम सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एडीपीसी की है। ऐसे में इस बारे में वही बता पाएंगे।”
– मधु भार्गव, सीडीईओ 40% खाली जमीन की शर्त पूरी करनी थी : समसा सीधी बात अनित शर्मा , एडीपीसी समग्र शिक्षा अभियान बिल्डिंग निर्माण के नियम-कायदे विभाग पर लागू नहीं होते? विभाग के भवन बनाने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं है। जमीन ही विभाग के नाम पर नहीं है, फिर निर्माण कैसे किया?
टाइटल देखना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। जमीन का रिकॉर्ड रखना डीईओ की जिम्मेदारी है। ऐसी क्या जरुरत पड़ गई कि पोखर में मिट्टी भरवा कर निर्माण करवाया गया?
बिल्डिंग के लिए प्लॉट की 40% जमीन खाली छोड़ना जरूरी है। बिल्डिंग के आगे सड़क की जमीन पर निर्माण क्यों करवाया गया?
आस-पास की दूसरी बिल्डिंगों के बराबर ही चार दीवारी बनी है। ऐसा है तो पीछे की ओर बिल्डिंग लाइन मेंटेन क्यों नहीं की?
वहां पुराना निर्माण था। उसे ही हटा कर नया निर्माण कराया गया है। निर्माण टूटा तो आर्थिक नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन होगा?
संस्था प्रधान की जिम्मेदारी होगी। निर्माण समसा करा रही है, फिर आपकी जिम्मेदारी क्या है?
हमारा काम केवल निर्माण की मॉनिटरिंग करना है।


