शिक्षा विभाग:स्कूलों की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ के प्रस्ताव भेजे, बजट में मिले सिर्फ 500 करोड़

प्रदेश में करीब 3768 स्कूल जर्जर हैं। इनको जीर्ण-शीर्ण घोषित किया गया। इनमें से 2558 भवनों को औपचारिक रूप से जर्जर घोषित किया जा चुका है और 1210 को प्रक्रिया में रखा गया है। वैसे असुरिक्षत की श्रेणी में 5667 स्कूलों को रखा गया है। झालावाड़ घटना के बाद ठीक कराने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाया गया लेकिन बुधवार को बजट में सिर्फ 500 करोड़ रुपए ही आवंटित हुए। हालांकि शिक्षा विभाग इसको लेकर वाहवाही बता रहा है लेकिन कम राशि मिलने का मतलब साफ है कि आने वाले मानसून में मरम्मत से वंचित होने वाले जर्जर स्कूलों में बच्चों को बैठना होगा। दरअसल झालावाड़ स्कूल की घटना के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया था। सामने आया कि प्रदेश में 5667 स्कूल पूरी तरह असुरक्षित हैं। एक प्रारंभिक सर्वे में पाया गया कि लगभग 5667 स्कूल इतने खराब हैं कि उन्हें पूरी तरह असुरक्षित माना गया जहां पूरी तरह भवन का उपयोग करना खतरनाक है। 86,934 कक्षाएं पूरी तरह जर्जर हैं। राज्य के सरकारी स्कूलों की कुल 63018 स्कूलों में से लगभग 86934 कक्षाएं पूरी तरह असुरक्षित और जर्जर हैं। 41178 स्कूलों को छोटे से बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 41178 स्कूलों में मरम्मत की आवश्यकता है हालांकि ये पूरी तरह असुरक्षित तो नहीं पर मरम्मत जरूरी है। प्रदेश की स्कूलों में 17109 शौचालयों को जर्जर घोषित किया गया है। इसके साथ ही 29093 शौचालयों को मरम्मत की जरूरत खुद शिक्षा विभाग ने माना है। अब सवाल ये है कि शिक्षा विभाग ने जो 20 हजार करोड़ का प्रस्ताव भेजा था उसमें से सिर्फ 500 करोड़ से क्या होगा। निदेशालय का काम जर्जर स्कूल बताना है
स्कूलों की मरम्मत से लेकर बजट प्रस्ताव, आवंटन, भुगतान तक का दायित्व समसा का है। समसा का काम है जर्जर, असुरक्षित या मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की पहचान करना, प्रस्ताव और बजट, मरम्मत, पुनर्निर्माण कराना यदि भवन अत्यधिक जर्जर है, तो छात्रों की सुरक्षा के लिए अस्थायी कक्ष/वैकल्पिक व्यवस्था करना। शिक्षा निदेशालय का काम सिर्फ जर्जर स्कूल बताना है।

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