डूंगरपुर| मां बाड़ी केंद्रों पर कार्यरत करीब 4 हजार 600 शिक्षा सहयोगी पिछले दिनों से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल का सीधा असर 15 हजार 235 जनजाति बच्चों की पढ़ाई, पोषण और देखभाल पर पड़ रहा है। केंद्रों पर शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह बंद हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। मां बाड़ी और डे-केयर केंद्र सुबह से दोपहर तक निर्धारित समयानुसार संचालित किए जाते हैं। इन केंद्रों पर बच्चों को सुबह नाश्ता और दोपहर का पौष्टिक भोजन दिया जाता है। साथ ही खेलकूद, प्रारंभिक शिक्षा और उनकी रुचि के अनुसार गतिविधियां करवाई जाती हैं। इन सुविधाओं के कारण जनजाति क्षेत्रों के अभिभावक निश्चिंत होकर कृषि और मजदूरी कार्य के लिए अपने बच्चों को केंद्रों पर छोड़ जाते हैं। कार्मिकों की पहले तो कलमबंद हड़ताल चली। अब शनिवार से आक्रोशित हड़ताल पर उतर आए है। लेकिन हड़ताल के चलते बच्चों को न तो शिक्षा मिल पा रही है और न ही पोषण व देखभाल की सुविधा। छोटे-छोटे बच्चे बिना पढ़ाई के घर लौट रहे हैं। इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। परीक्षाएं नजदीक होने के बावजूद बच्चों को मार्गदर्शन और नियमित उपस्थिति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा सहयोगियों की प्रमुख मांग है कि उन्हें जनजाति ग्राम विकास समिति के अधीन व्यवस्था से हटाकर वरिष्ठता के आधार पर कैडर निर्धारित किया जाए तथा उन्हें राजस्थान कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स में एडॉप्ट किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में सेवा सुरक्षा और स्पष्ट पदस्थापन नीति का अभाव है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है। इधर विधानसभा का बजट सत्र जारी है। लेकिन अब तक इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। यदि शीघ्र वार्ता कर निर्णय नहीं लिया गया तो इसका सीधा खामियाजा जनजाति क्षेत्र के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ेगा। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सरकार से त्वरित हस्तक्षेप कर हड़ताल का समाधान निकालने की मांग की है। ताकि बच्चों की शिक्षा और पोषण व्यवस्था पटरी पर लौट सके। ^अभी तक निर्णय कोई संज्ञान में नहीं लिया है। 13 से हमारी कलमबंद हड़ताल चल रही थी। आज से तालाबंद हड़ताल चल रही है। सोमवार को प्रत्येक जिला मुख्यालय पर घेराव होगा। इसमें सभी केंद्रों पर ताला कर जिला परियेाजना अधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। -पूंजीलाल रोत, संयोजक, मां बाड़ी शिक्षा सहयोगी संघ।


