शिमला में ग्रामीणों को कंधे पर ढोने पड़ रहे मरीज:सनाथली में 80 साल से नहीं सड़क; लोग पलायन को मजबूर

शिमला जिले में रामपुर की रचोली पंचायत का सनाथली गांव पिछले आठ दशकों से सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को बीमार व्यक्तियों और शवों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए चार किलोमीटर पैदल कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी भी आपात स्थिति में, मरीज को पहले कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाया जाता है, जिसके बाद ही उसे अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। सड़क नहीं होने से लोग परेशान स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल सर्वेक्षण और घोषणाएं ही होती रही हैं। गांव में रोजमर्रा का सामान लाने के लिए भी लोगों को जंगल के रास्तों से पीठ पर बोझ उठाकर लाना पड़ता है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। लोगों ने किया पलायन सड़क सुविधा की कमी के कारण गांव से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है। एक समय जहां सनाथली गांव में लगभग 50 परिवार रहते थे, वहीं अब केवल 18 परिवार ही बचे हैं। अधिकांश ग्रामीण दोगरी हलोग, जबाया, घौटी, दर्शाई और रोपडू जैसे क्षेत्रों में जा चुके हैं। संपर्क मार्ग न होने से खेती-बाड़ी और पशुपालन जैसे पारंपरिक रोजगार के साधन भी सीमित हो गए हैं। शव को कंधे पर ले जाने को मजबूर लोग हाल ही में एक बुजुर्ग महिला की अस्पताल में मृत्यु के बाद, गांव के युवाओं को उनके शव को डंडों के सहारे पीठ पर उठाकर हलोग से सनाथली गांव तक लाना पड़ा। ऐसी ही स्थिति बीमार व्यक्तियों के साथ भी आती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है ताकि उन्हें इस अमानवीय स्थिति से राहत मिल सके।

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