भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद छिड़ी राष्ट्रीय बहस के बाद अब मप्र में भी राजनीति गरमा गई है। रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी में साफ किया कि डील में अमेरिका से देश में आयात के लिए कृषि और डेयरी उत्पादों को कोई छूट नहीं दी गई है। कांग्रेस ने पलटवार कर पूछा कि क्या केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लिखित गारंटी देंगे कि इस डील से मप्र सहित देश के किसानों का नुकसान नहीं होगा। डील में कोई कृषि उत्पाद शामिल नहीं, किसान सुरक्षित : शिवराज राजधानी में मीडिया से चर्चा मे केंद्रीय कृषि मंत्री ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर कहा कि डील के बावजूद देश की खेती और किसान पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को मांस, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, एथेनॉल और तंबाकू सहित किसी भी कृषि उत्पाद पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। साथ ही, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, छिल्का रहित अनाज एवं आटा, आलू, प्याज, मटर, बीन्स और मिक्स डिब्बाबंद सब्जियां भी भारत में आयात नहीं होंगी। इसके अलावा, लिक्विड, पाउडर एवं कंडेंस्ड दूध, क्रीम, योगर्ट, बटर मिल्क, मक्खन, घी जैसे अमेरिका के दुग्ध उत्पादों और मसालों को भी भारत में भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चौहान ने कहा कि डील में ऐसा कोई भी कृषि उत्पाद शामिल नहीं किया गया है, जिससे भारतीय किसानों को किसी प्रकार का नुकसान हो। सभी संवेदनशील कृषि वस्तुओं को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में किसी भी प्रकार के आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) कृषि उत्पादों को आयात अनुमति नहीं मिलेगी। इससे कृषि की शुद्धता और मिट्टी-बीज सुरक्षित रहेंगे। लिखित में दें कि डील से किसानों का नुकसान नहीं होगा : पटवारी
कांग्रेस ने अमेरिका से हुई डील को लेकर केंद्रीय मंत्री के बयान पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने सरेंडर कर चुके हैं। ये डील अडानी को अमेरिका में चल रहे मुकदमों से बचाने और रूस से तेल नहीं खरीदने के दबाव के हुई है। पटवारी ने कहा कि चौहान ने किसानों को भरोसा तो दिलाया पर उत्पाद-वार टैरिफ संरचना, नॉन-टैरिफ बैरियर की शर्तें और प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में 400 -500 एकड़ के खेत हैं, भारत में दो से ढाई एकड़ के। वहां की 1 से 2% आबादी खेती पर निर्भर है, देश में कुल आबादी का बड़ा हिस्सा इस पर निर्भर है। अमेरिका में खेती पर भारी सब्सिडी भी है, ऐसे में खुली प्रतिस्पर्धा से भारतीय किसान कैसे बचेंगे? उन्होंने केंद्रीय मंत्री से सवाल किए कि क्या वो लिखित गारंटी देंगे कि डील से सोयाबीन आयात होगा और कीमतें नहीं गिरेंगी। एमएसपी व्यवस्था सुरक्षित रहेगी और पशु आहार आयात से मक्का किसानों को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि डील के प्रभाव मूल्यांकन की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।


