भास्कर न्यूज | गरियाबंद
जिला प्रशासन ने अपर कलेक्टर नवीन भगत के विरुद्ध चल रही विभागीय जांच को तेज कर दिया है। उन पर सहायक आयुक्त रहते निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितता, अधूरे कामों का नियम विरुद्ध भुगतान और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों की परतें खुल रही हैं। प्रारंभिक जांच में कई मामलों में प्रथम दृष्टया अनियमितता के संकेत मिलने के बाद प्रशासन ने उनसे सभी विभागीय प्रभार वापस ले लिए हैं। बता दें कि मामले की जांच जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में टीम कर रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार कई निर्माण कार्य धरातल पर अधूरे हैं, लेकिन कहीं पूरा तो कही 80 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान कर दिया गया है। प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना जैसे महती योजनाओं में भ्रष्टाचार और कथित गड़बडिय़ों की भी पुष्टि हुई है। टेंडर प्रक्रिया के पालन पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। जांच के दौरान लगातार बिना अवकाश/अनुमति अनुपस्थित रहने का भी गंभीर मामला सामने आया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच शुरू होने के बाद संबंधित अधिकारी नियमित रूप से कार्यालय नहीं पहुंचे। बीते तीन महीनों में उनकी उपस्थिति अत्यंत सीमित रही। इस पर कलेक्टर द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद उन्होंने चिकित्सीय कारणों का हवाला देते हुए मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिन्हें अब तक औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली है। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने कहा कि जांच अंतिम चरण में है। जैसे ही जांच पूरी होगी जानकारी दी जाएगी। इस मामले में कलेक्टर बीएस उइके ने कहा कि जांच जारी है, पांच सदस्य टीम जांच कर रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


